परासिया:- पादुर्णा जाम नदी पर भरने वाला प्रसिध्द गोटमार मेला चण्डी माता की पूजा अर्चना एवं विभिन्न परम्पराओ के निर्वहन उपरांत सम्पन्न हुआ। गोटमार मेले मे शामिल हजारो श्रृध्दलूओ में 200 से ज्यादा लोग घायल हुए 2 अति गंभीर घायलो को उपचार हेतू नागपूर भेजा गया। वर्षो पूर्व से चली आ रही मेले की उक्त परम्परा में सावरकर गावं एवं पाढुर्णा गावं के लोगो द्वारा एक दूसरे पर पत्थर बरसाएं जाते हैं- इस खतरनाक परम्परा में प्रतिवर्ष सैकड़ो लोग घायल होते है कई लोगो की जाने भी चली जाती है। मेले का आयोजन पोला पर्व के दौरान जाम नदी में किया जाता है। नदी के बीचो बीच पलाश को पेड़ लगाकर पूजा अर्चना की जाती है, पेड़ पर एक झण्डा लगाया जाता है, इसी झण्डे का पाने दो गांव के लोग
आपस में पत्थर बाजी करते है तथा झण्डा उतार कर लाने वाले गाव के लोग जीत का जश्न मनाते है- इस खतरनाक पत्थर बाजी में पहले गोफन का उपयोग किया जाता था जिससे अनेको लोग गंभीर घायल हो जाते थे कुछ लोगो की जान भी चली जाती थी. मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन पूर्णत: चाक चौबंद होकर व्यवस्था सभालता है किन्तु परम्परा के चलते पत्थर बाजी पर रोक नहीं लग सकी है जाम नदी संगम पर वर्षो पुरानी परम्परा के तहत उक्त मेले का आयोजन होता है, हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा पादुर्णा को जिला बनाने की घोषणा भी की जा चुकी है, लगभग 70 वर्षो से पत्थर मार मेला इस क्षेत्र में लगता है, पूर्व के वर्षो में गोफन से पत्थर बाजी कि जाती थी अभी तक दर्जनो लोगो की जान भी इस पत्थर बाजी में जा चुकी है-
प्रेमी जोड़े से जुड़ी है किवदंती :- गोटमार मेले को लेकर प्रेमी जोड़े की कहानी से जोड़ा जाता है, पाढुर्णा के एक युवक सावरकर गांव की युवती को भगा कर ले गया था, प्रेमी जोड़ा जाम नदी पार कर रहा था इसी दौरान युवती के परिजनो ने उनपर पथराव शुरू कर दिया, जानकारी मिलने पर युवक पक्ष के लोग भी नदी पहुंच कर पथराव करने लगे नदी के बीच है प्रेमी जोड़े की मौत हो गई. पथराव निरन्तर चलता रहा प्रेमी जोड़े की मौत उपरान्त ग्रामीणो ने उनके शव को मां चण्डिका के दरबार ले जाकर उनका अंतिम संस्कार किया। इस घटना के बाद प्रतिवर्ष दोनो गांव के लोग प्रसिध्द मां चण्डी देवी के मंदिर पहुच और पूजा अर्चना कर नदी के दोनो किनारों से एक दुसरे पर पत्थर बाजी करते है, इस खूनी पत्थर बाजी मे प्रतिवर्ष सैकड़ो लोग गंभीर घायल होते है, मेले के दौरान जिले भर से पुलिस बल प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहते है। जिला
प्रशासन द्वारा धारा 144 लगाकर शराबबंदी हथियारों के प्रदर्शन में प्रतिबंध आदि सख्ती रखी जाती है, प्रतिवर्ष पत्थर बाजी में दोनो गावं अनेको लोग घायल होते किन्तु मेले के उपरान्त दोनो गांवो के लोगो मे कोई मन मुटाव नही रहता। परम्परा के नाम पर वर्षो से यहा खूनी खेलखेला जाता है, प्रशासन की सख्ती उपरान्त दोनो पक्षों द्वारा ट्राली भर-भर कर मेला स्थल पर पत्थर एकत्रित किए जाते है, पूजा उपरान्त इन्ही पत्थर एक दूसरे पर बरसाए जाते है इसलिए इसे गोटमार मेला कहा जाता है, विश्व प्रसिध्द उक्त मेला प्रेमी जोड़े के मौत से शुरू हुआ जो निरन्तर जारी है।








