पीपरी – वैसे तो बागली विकासखंड के सीता वन क्षेत्र में धार्मिक मान्यता अनुसार कई धरोहर बिखरी पड़ी है। सभी धरोहर को श्रृंखलाबद्ध तरीके से आधुनिकता से जोड़ दिया जाए तो यह स्थान पर्यटन के मानचित्र पर बड़ी भूमिका निभा सकता है । ऐसी ही धरोहर में पिपरी से 5 किलोमीटर दूर निमनपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत कटुक्या नाले के समीप क्षेत्र का प्राचीन वट वृक्ष विद्यमान है। प्राचीन किवंदती अनुसार इस स्थान को अलग-अलग नाम से जाना जाता है कुछ लोग इसके विस्तार को और
50 से अधिक शाखों को देखते हुए इसे बिच्छू बड़ कहते हैं । लेकिन जटाशंकर के दिवंगत महंत केशव जी महाराज इस स्थान को पवन और चैतन्य भूमि कहते हुए बताते थे कि यह जाजम बड है और ऋषि जामवंत का तपस्थली स्थान है। वहीं स्थानीय लोग इस स्थान को देवतुल्य स्थान मानते हैं इसके चलते वट वृक्ष की शाखों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। बोल बम कावड़
यात्रा के संयोजक गिरधर गुप्ता ने बताया कि इस स्थान पर आकर शांति का अनुभव होता है वही रायपुर निवासी बजरंगी लाल अग्रवाल ने भी इस स्थान को देखते हुए बताया कि प्राचीन समय में यहां पर वानप्रस्थ आश्रम के दौरान तपस्या करने आते होंगे वनस्पति विज्ञान से जुड़े डॉक्टर अनिल योगी ने बताया कि यह वृक्ष 1000 वर्ष पुराना हो सकता है इस वृक्ष को संरक्षित कर
इस पर शोध किया जाना चाहिए वैसे बरगद पेड़ की उम्र अधिकतम 300 वर्ष रहती है लेकिन यह इतनी शाखों में विभाजित है जो शोध का विषय है । युवा सनातनी सुमित गुप्ता बताते हैं कि क्षेत्र की अतुल्य धरोहर धारा जी सीता मंदिर कावड़िया पर्वत बिच्छू बड़ सीता समाधि जयंती माता अखिलेश्वर मठ झाड़ उखाड़ हनुमान सहीत दर्जन भर अन्य स्थानों को
पर्यटन योजना के तहत पक्के मार्ग से जोड़कर इस स्थल को विकसित कर देना चाहिए जिसके चलते यहां के लोगों को रोजगार भी मिले और क्षेत्र की जानकारी भी देश-विदेश तक पहुंचे ।








