छिन्दवाड़ा:- म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक कुशल भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। अपने राजनैतिक जीवन काल में इन्होने कांग्रेस के अनेकों पदो में कार्य करते हुए केन्द्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान स्थापित की है, गांधी परिवार के विश्वसनीय एवं काफी करीबी होने के साथ – साथ कमलनाथ का विपक्षी नेताओ से भी निजी सम्बंध होना उनके कुशलतम राजनीतिज्ञ होने का परिचायक है। 18 नवं 1946 को कानपूर के नाथ परिवार में जन्मे कमलनाथ की प्राराभिक शिक्षा कोलकता से हुई। दून इटरनेशनल स्कूल देहरादून में संजय गांधी के सहपाठी रहकर शिक्षण प्राप्त किया इस दौरान वह गांधी परिवार के नजदीकी रहे एवं परिवार के सदस्य बन गए, इंदिरा जी ने इन्हें अपना तीसरा बेटा बताकर छिन्दवाड़ा की लोक सभा सीट से 34 वर्ष की आयु में पहली वार चुनावी मैदान में उतारा और जब से निरन्तर कमलनाथ छिन्दवाड़ा को अपनी कर्म भूमि मानते हुए यंहा के लोकप्रिय राजनेता बन गए,
वर्ष 1980 में पहली बार सांसद चुनकर लोक सभा पहुंचे। 40वर्षो के राजनैतिक सफर में अनेकों उतार-चढ़ाव के बाद उन्हें वरिष्ठ सांसदो में सुमार किया जाता है। उनकी इस यात्रा में उन्हें एक बार हार का सामना भी करना पड़ा तथा हवाला कांड में नाम आने पर एक बार पद से इस्तीफा भी देना पड़ा। कमलनाथ कांग्रेस के अग्रिम पक्ति के सिपहसलारो में होने के साथ-साथ अनेकों मोको पर कांग्रेस के संकटमोचक भी बने किन्तु मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते सिधिया जी की बगावत एवं कांग्रेस से इस्तीफा देकर पार्टी बदलने से सत्ता परिवर्तन हुआ, इस जोर अजमाईस में उन्होने प्रदेश की गरिमा बनाये रखने के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया ओर खरीद फरोख्त की राजनीति को ना अपनाते हुए 20 मार्च 2020 मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में निरन्तर कार्य कर रहे है ।
“छिन्दवाड़ा को बनाई अपनी कर्म भूमि”
कानपूर उत्तर प्रदेश के रहने वाले कमलनाथ ने राजनीति में आने के बाद छिन्दवाड़ा को अपनी कर्म भूमि बनाया। कमलनाथ ने जब अपना सफर शुरू किया तो छिन्दवाड़ा पिछडें जिलों की श्रेणी में सुमार था 40वर्षो के निरन्तर प्रयासों से छिन्दवाड़ा में किये गये विकास कार्य एवं जनसुविधाओं के लिए बनाई गई योजनाओं में अमल के चलते आज छिन्दवाड़ा मध्यप्रदेश विकास मॉडल के रूप में जाना जाता है ।
छिन्दवाड़ा को अपनी कर्म भूमि बनाते हुए कमलनाथ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल, परिवहन, सड़क रोजगारोन्मुखी ट्रैनिंग सेन्टर, कृर्षि क्षेत्र के लिए सिचाई व्यापार जगत के लिए एवं सामाजिक धार्मिक क्षेत्रों में विशेष रूचि दिखाते हुए अनेको आयाम स्थापित किये, जिसके चलते पिछड़ा जिला मध्यप्रदेश के उन्नत क्षेत्रों की श्रेणी में सुमार किया जा सकता है। उनके राजनैतिज्ञ प्रतिद्वन्दि भी उनकी कार्य कुशलता का लोहा मानते है ।
यह उनका छिन्दवाड़ा के प्रति व्यक्तिगत लगाव ही है कि उन्होने जिले के लिए अपने प्रभार वाले मंत्रालयों से हमेशा वृहद योजनाओं को जिले में लाया जिसका लाभ निरन्तर जिले वासियो को मिल रहा है। पत्नि अलका नाथ पुत्र नकुलनाथ को भी जिले वासियो ने अपना सांसद चुनकर लोक सभा में जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए पहुचाया यह दर्शाता है कि जिले वासी भी कमलनाथ पर अपना अटूट विश्वास एंव प्यार लुटाते है। जिसके परिणाम स्वरूप नाथ परिवार ने छिन्दवाड़ा को अपनी कर्म भूमि बनाते हुए यंहा परिवारिक रिश्तो की तरह जन सेवा निरन्तर की है।
स्वच्छ छवि तथा कांग्रेस के प्रति निष्ठा ने उन्हें गांधी परिवार का सबसे विश्वसनीय एवं करीबी बना दिया अनेकों मौको पर उन्होने अपनी अहम भूमिका निभाते हुये कांग्रेस को संकटो से उवारा फलस्वरूप उन्हें गांधी परिवार का अहम सदस्य माना जाता है वे अपनी भूमिका को भी उसी विश्वास के साथ निर्वहन करते रहे है। मध्यप्रदेश अध्यक्ष के पद के बाद उन्हें मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री मनोनित किया गया हलांकि 15 माह बाद उन्हें राजनैतिक उथल-पुथल के चलते इस्तीफा देना पड़ा था।
“कमलनाथ का राजनैतिक सफर”
वर्ष 1980 में पहली वार सातवी लोकसभा के लिए छिन्दवाड़ा से कांग्रेस सांसद के रूप में उन्हे चुना गया, वर्ष 1985 में दुबारा सासंद चुने गए। 1989 में लगातार तीसरी वार सांसद बने 1991 में पुनः उन्हें छिन्दवाड़ा से प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला इस दौरान उन्हें काग्रेस सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौपी गई । वर्ष 1995-96 तक वे केन्द्रीय राज्यमंत्री, कपड़ा स्वतन्त्रप्रभार के रूप में अपनी सेवाए दी, वर्ष 1998 में 12 वी लोकसभा के लिए उन्हें सांसद चुना गया।
इस दौरान उन्होने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में महा सचिव के रूप में संगठन में भी अपनी सेवाए दी वर्ष 2004 मे केन्द्रीय वाणिज्य और उघोग मंत्री वे रूप में कार्य किया । 15 वी लोक सभा में वे केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री बने 2011 में मंत्री परिषद् में फेरबदल के दौरान शहरी विकास मंत्री बनाए गए वर्ष 2012 में सांसदीय कार्य मंत्रालय का कार्यभार उन्हें सौपा गया लोक सभा में वरिष्ठतम सांसदो की श्रेणी में कमलनाथ को रखा जाता है। योजना आयोग के पदेन सदस्य, लोकसभा प्रोटेम स्पीकर आदि महत्वपूर्ण पदों में रह कर र्निविवाद सेवाए देने के उपरान्त उन्हें मध्यप्रदेश काग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। 17 दिस. 2018 को उन्होने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली सिंधिया जी के कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले जाने के कारण मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री पद से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
“कमलनाथ की उपलब्धिया एवं विवाद”
विवादों से बचकर चलने वाले कमलनाथ के नाम अनेकों उपलब्धिया तो है ही कुछ मामलो मैं वह विवादो में भी रह है। 1984 के सिख विरोधी दंगों में उनका नाम जोड़ा गया, हवालाकांड में नाम आने के कारण उन्हें लोक सभा की सदस्यता से इस्तीफा भी देना पड़ा था। उनकी उपलब्धिया में अनेको उपाधि के अलावा उनकी पर्यावरण सम्बंधी चिन्ता व्यक्त करती है भारत की सदी एवं भारत की शताब्दी नामक पुस्तके भी लिखी है, लोक सभा में सबसे लम्बे समय तक सेवारत रहे सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से उन्हें 16वी लोकसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया।
कमलनाथ एक धैर्यशील एवं दीर्घकालीन सोच रखने वाले राजनेता माने जाते है, उनकी प्रशासनिक प्रबंधन क्षमता के साथ विरोधियो को साधने की कला भी अनुठी है। संजय गांधी से उनके दोस्ती के किस्से भी चर्चित रहे है। अपने दोस्त संजय गांधी को तिहाड़ जेल में साथ देने के लिए उन्होने जज से लड़ने के आरोप मे सात दिन की जेल भी काटी। व्यक्तिगत रूप से आर्थिक सक्षम कमलनाथ उद्यमी भी है उनकी अनेक कम्पनिया है जो उनके पुत्र संचालित करते है। 9 वार छिन्दवाड़ा संसदीय सीट से जीत दर्ज करा चुके वही मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री रहते हुए छिन्दवाड़ा विधान सभा से उन्होने विधायक चुनाव भी जीता उनके विश्वसनीय कहे जाने वाले छिन्दवाड़ा विधायक दीपक सक्सेना ने अपनी सीट से इस्तीफा दिया जंहा से कमलनाथ विधायक चुने गए।
2006 में मानद डाक्टर उपाधि से जबलपुर रानी दुर्गावती विश्व विद्यालय में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। धर्म के प्रति आस्था रखने वाले कमलनाथ ने अपने खर्च पर छिन्दवाड़ा सिमरिया हनुमान जी का विशाल मंदिर निर्माण कराया जिसमें 101 फिट ऊंची हनुमान जी प्रतिमा स्थापित की गई। जहां वर्तमान में ही वागेश्वर धाम शास्त्री धीरेन्द्र शास्त्री जी भी यहा अपनी कथा वाचन कर चुके है। जो कार्यक्रम मध्यप्रदेश की राजनीति गलियारों में विशेष चर्चा का विषय भी बना हुआ है। भक्ति की भावना के दर्शन कमलनाथ में कार्यो में भी झलकती है। उनके मुख्यमंत्री रहते किए गये धार्मिक कार्यो में महाकाल मन्दिर विकास, ओमकारेश्वर मंदिर विकास, राम वनगमन पथ, गौशाला निर्माण, ऊ सर्किट निर्माण, शिप्रा की सफाई, नर्मदा नदी का संरक्षण, पुजारियो का मानदेय वृध्दि जैसे कार्य उनके द्वारा किए गए है। वे भारत को आर्थिक, सैन्य, शक्तियों में सुमार नही करते, बल्कि भारत को विश्व की अध्यात्मिक शक्ति जरूर मानते है ।
उनका विशेष रूप से मानना है कि इतने त्यौहार, धर्म, जाति, परम्परा, परिधान, भाषा एवं संस्कार विश्व के किसी भी देश में नही देखे जाते, भारत ही विश्व की अध्यात्मिक शक्ति है।
उनका विशेष रूप से मानना है कि इतने त्यौहार, धर्म, जाति, परम्परा, परिधान, भाषा एवं
संस्कार विश्व के किसी भी देश में नही देखे जाते, भारत ही विश्व की अध्यात्मिक शक्ति है।

“योजनावृध्द तरीके से हुआ छिन्दवाड़ा का विकास”
अनेकों मामलो में पिछड़ा जिला छिन्दवाड़ा में दीर्घकालीन योजनाओं को ध्यान में रख कर विकास कार्य इनके द्वारा कराये गये जिन्हें वर्षो के अथक प्रयासो से फलीभूत किया गया, वर्तमान में छिन्दवाड़ा को विकास मॉडल के रूप में देखा जाता है। आदिवासी वाहुल्य एवं पिछड़ा जिला जब पेयजल, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे मूलभूत साधनों के लिए भटकता था, जब 1980 में इन्दिरा गांधी ने अपने तीसरे बेटे के रूप में कमलनाथ को जिले की जिम्मेदारी सौपी और सांसद चुने जाने के बाद छिन्दवाड़ा का स्वरूप बदलता गया, क्षेत्र से 9 वार सांसद एवं विभिन्न विभागों में केन्द्रीय मंत्री रहें कमलनाथ ने यहा स्कूल कालेज. अस्पताल, आई.टी. पार्क, ट्रैनिंग सेंटर आदि बनवाए।
रोजगार के लिए वेस्टर्न कोलफील्ड में नई खदानों के अलावा हिन्दुस्तान युनी लीवर जैसे कम्पनियों को खुलवाया, क्लाथमेकिंग ट्रैनिंग इस्ट्रीटयुट, ड्रायवर ट्रैनिंग सेंटर खुलवाए सडक, रेल सुविधाओं एवं कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन योजनाओं पर कार्य करते हुए जिले का स्वरूप बदला। 1984 सिख दंगो एवं हवाला कांड को अगर अपवाद मान ले तो सालो साल तक अहम मंत्रालयों के मंत्री रहने के बाद भी कमलनाथ का नाम किसी विवादो मे नही आया, उनकी छवि एक स्वच्छ राजनेता के रूप में हमेशा स्वीकार्य रही है। जिले की कमान सभालने के बाद से निरन्तर कमलनाथ जिलेवासियों से पारिवारिक रिश्तो की तरह उनके लिए दिल्ली छिन्दवाड़ा भोपाल में 24 घंटे उपलब्ध रहते है। अपने निजी खर्चों पर उन्होने अब तक हजारो गरीबों का इलाज, शिक्षा क्षेत्र एवं व्यक्तिगत अन्य मदद की जो उनकी विशिष्टता को साबित करता है।

इसके पीछे उनके निज सहायक राजेन्द्र मिगलानी का भी जिक करना होगा जो पिछले 40 वर्षो से उनके सहायक के रूप में कार्य करते हुए सम्पूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे है। कमलनाथ की क्षमता को लेकर विरोधी भी संदेह नही रखते ये बात अलग है कि कमलनाथ अपने कार्यो का गुणगान बखान करना पसंद नही करते तथा खुद को लो प्रोफाईल रखना पंसद करते है। गांधी परिवार में वर्षों की निकटता के साथ लंबा राजनैतिक कैरियर बड़े उद्यमी होने का अहम आज तक उनके व्यवहार से नहीं झलका हमेशा ही उनका आभा मंडल अन्य राजनेताओं से विरला एवं सरल नजर आता रहा है। भारत की ओर अनेक अवसर पर विदेशो में भी इन्होने अपनी क्षमता एवं कार्य शैली से सभी को प्रभावित किया है। वर्तमान परिवेश में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते संगठन की मजबूती एवं अगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी सक्रियता एवं राजनैतिक चातूर्यता से अपनी विसात बिछा रहे है, हलाकि परिणाम भविष्य की गर्त में है।
लेखक मनोज गढवाल वरिष्ठ पत्रकार है, पूर्व सरपंच भी रहे है







