मूलचन्द मेधोनिया पत्रकार भोपाल मोबाइल 8878054839
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भोपाल ।
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली की तमाम बॉर्डर को घेरते हुए मोदी सरकार द्वारा तीन काले कृषि कानून लाए गए थे जिन्हे किसानों के संगर्ष के आगे घुटने टेकते हुए किसानों से माफी के साथ बापिस लेने बाध्य होना पड़ा और शेष मांगें एमएसपी गारंटी कानून बनाए जाने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश अनुसार C2+50के आधार पर समर्थन मूल्य घोषित करने, 5किसानो एवं 1पत्रकार की हत्या के लिए जिम्मेवार ग्रह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टैनी की बर्खास्तगी एवंगिरफ्तारी, बिजली बिल की बापसी, किसानों पर बनाए गए प्रकरण वापिस लेने सहित अन्य मांगो के निराकरण हेतु लिखित आश्वासन के बाद एक वर्ष से अधिक समय तक कोई ध्यान न देकर मोदी एवं शिवराज सरकार किसान मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर बरबादी की ओर धकेल रही है।
मोर्चे ने राष्ट्रीय मांगो का मांगपत्र महामहिम राष्ट्रपति के नाम दिया एवं प्रदेश के हर जिले की स्थानीय समस्याओं संबंधी ज्ञापन राज्यपाल के नाम देकर कार्यवाही की मांग की है।
मध्य प्रदेश में 20किसान संगठनो ने शिरकत करते हुए भोपाल के शाहजहानीबाद पार्क में एकत्रित होकर एक आमसभा की जिसे विभिन्न संगठनो के नेताओं ने संबोधित करते हुए सरकार द्वारा किस तरह की नीतियां लाकर किसान मजदूर कर्मचारी को बर्बाद कर रही हैं।
नरसिंहपुर जिले से मध्य प्रदेश किसान सभा , स्वतंत्र किसान संगठन की भागीदार रही, जिले से सभा के अध्यक्ष मंडल में किसान सभा से जगदीश पटेल एवं स्वतंत्र किसान संगठन से ब्रजमोहन कौरव को स्थान दिया गया।
नरसिंहपुर जिले से ब्रजमोहन कौरव द्वारा अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री एवं कुछ किसान संगठनो को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शिवराज सिंह जी नकली किसानो के बीच तो आए थे, मुर्दा जेसो के बीच में तालियां बटोरी गई,आज असली किसान जगे हुए किसान वास्तविक समस्याएं लेकर आए हुए हैं हमारे बीच में आएं, आप जितने दूर भागोगे उतने जल्दी किसान भी तुम्हे दूर भगाने में देर नहीं करेगा ।
सभा का संचालन अखिल भारतीय किसान सभा के नेता बादल सरोज एवं प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अशोक तिवारी द्वारा किया गया।
सभा के उपरांत रैली के रूप में किसानों ने मार्च शुरू किया आगे चलकर पुलिस प्रशासन ने किसानों को रोकने जबरजस्त बेरिकेटिंग की गई, पुलिस और नेताओं के बीच घंटो ज्ञापन लेने को लेकर बहस एवं किसानो ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया, अंत में एक प्रतिनिधिमंडल का तय हुआ जो राजभवन जाकर प्रमुख अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आए।
संयुक्त किसान मोर्चे ने दिल्ली में हुए आन्दोलन को पुनः लगातार जारी रखने का संकल्प लिया।







