दिवाली पर सूर्य ग्रहण की बात सुनकर कई लोग परेशान
सूर्यग्रहण के साथ शुरू हो रहे कठिन समय मे परिवार की सूखकारी केलिए अपने इष्ट कुलदैवता ओर महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने यथाशक्ति प्रयत्न करें
हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार दीपावली आने वाला है. इस साल दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा. हालांकि दिवाली पर सूर्य ग्रहण की बात सुनकर कई लोग परेशान हैं. दरअसल दिवाली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है और इस साल कार्तिक अमावस्या को सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है. लेकिन अमावस्या तिथि 24 और 25 अक्टूबर दोनों दिन रहेगी. ऐसे में दिवाली 24 तारीख की रात को मनाई जाएगी और सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर की शाम को लगेगा. फिर कुछ दिन बाद 08 नवंबर को देव दिवाली के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा. ज्योतिषाचार्यो ओर साधको के मत मुजब आनेवाला समय व्यक्ति , देश , दुनिया केलिए अत्यं कष्टमय होगा । अकाल , जलप्रपात , जलजला , चक्रवात जैसे कुदरती आपदा ओर भयानक युद्ध से देश दुनिया अनेक कष्ट भुगतेगी । एक वायरस ने पूरी दुनिया को बेन कर के आर्थिक तबाही मचाई थी , ऐसा ही युद्धजन्य प्रकोप से रोग , तबाही , महँगाई ,रक्तपात जैसी स्थिति की संभावना है । ऐसेमें परिवार की सुखकारी केलिए आर्थिक समृद्धि अत्यंत जरूरी होगी । माता महालक्ष्मी ओर कुलदैवत की प्रसन्नता सर्व स्नेहीजनों की रक्षा करे यही प्रार्थना है ।
अष्टलक्ष्मी पूजा उपासना :-
मां लक्ष्मी के आठों स्वरूपों में जीवन के आठ अलग-अलग वर्गों से जुड़ी हुई हैं. शुक्रवार को अष्ट लक्ष्मी का पूजन और उनके बीज मंत्र का जाप करने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है.
श्री आदि लक्ष्मी
श्री विद्या लक्ष्मी
श्री धान्य लक्ष्मी
श्री विजय लक्ष्मी यां वीर लक्ष्मी
श्री धैर्य लक्ष्मी
श्री गज लक्ष्मी
श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी
श्री संतान लक्ष्मी
पूजा विधान :-
मां लक्ष्मी के पूजन के लिए रात का समय शुभ माना गया है. गुरु , गणपति ओर कुलदैवत की पूजा ध्यान करे ।
स्वस्छ वस्त्र धारण कर पूजा की चौकी पर गुलाबी कपड़े पर श्रीयंत्र या अष्ट लक्ष्मी की तस्वीर स्थापित करें । यथा शक्ति मतिअनुसार माता का षोडशोपचार पूजन करे ।
अब अष्टलक्ष्मी के समक्ष 8 घी के दीपक जलाएं. अष्टगंध से श्रीयंत्र और अष्ट लक्ष्मी को तिलक लगाएं. मां को लाल गुडहल के फूलो की माला चढ़ाएं.
अष्टलक्ष्मी के बीज मंत्र ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा।। का एक माला जाप करें. फिर आठों दीपक को घर की आठ दिशाओं में रख दें ।
महालक्ष्मी मंत्र :-
” ॐ ह्रीं म्हालक्ष्मये नमः
इस मंत्र की 10 माला जाप करे और जाप के बाद एक माला मंत्र से यज्ञमे घी से आहुति दे । अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का एक पाठ करे ।
अथ श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम
आदि लक्ष्मी-
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि चंद्र सहोदरि हेममये ।
मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनी मंजुल भाषिणि वेदनुते ।
पङ्कजवासिनि देवसुपूजित सद-गुण वर्षिणि शान्तिनुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मि परिपालय माम ।
धान्य लक्ष्मी-
अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि वैदिक रूपिणि वेदमये ।
क्षीर समुद्भव मङ्गल रुपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदनकामिनि धान्यलक्ष्मि परिपालय माम् ।
धैर्य लक्ष्मी-
जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि मन्त्र स्वरुपिणि मन्त्रमये ।
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद
ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते ।
भवभयहारिणि पापविमोचनि साधु जनाश्रित पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि सदापालय माम् ।
गज लक्ष्मी-
जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि वैदिक रूपिणि वेदमये ।
रधगज तुरगपदाति समावृत परिजन मंडित लोकनुते ।
हरिहर ब्रम्ह सुपूजित सेवित ताप निवारिणि पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम् ।
सन्तान लक्ष्मी-
अयि खगवाहिनी मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये ।
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि सप्तस्वर भूषित गाननुते ।
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर मानव वन्दित पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि सन्तानलक्ष्मि परिपालय माम् ।
विजय लक्ष्मी-
जय कमलासनि सद-गति दायिनि ज्ञानविकासिनि गानमये ।
अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर भूषित वसित वाद्यनुते ।
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित शङ्करदेशिक मान्यपदे ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि विजयक्ष्मि परिपालय माम् ।
विद्या लक्ष्मी-
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये ।
मणिमय भूषित कर्णविभूषण शान्ति समावृत हास्यमुखे ।
नवनिद्धिदायिनी कलिमलहारिणि कामित फलप्रद हस्तयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम् ।
धन लक्ष्मी-
धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमी दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये ।
घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते ।
वेद पुराणेतिहास सुपूजित वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते ।
जय जय हे कामिनि धनलक्ष्मी रूपेण पालय माम् ।
अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । विष्णुवक्षःस्थलारूढे भक्तमोक्षप्रदायिनी ।। श्लोक ।। शङ्ख चक्र गदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः । जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलम शुभ मङ्गलम ।
अब माताजी की आरती करें । पूजान्ते
महादेव के मंत्र
” ॐ ह्रीं नमः शिवाय “
इस मंत्र की एक माला जाप करे । इस दिव्य पूजा उपासना शीघ्र फलदायी रहेगी । ये पूजन दिवाली के दिन भी कर सकते है । कुछ प्रांतोमे नवरात्र के बाद किसी भी अनुकूल समय पर ये महालक्ष्मी पूजन किया जाता है । अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ ओर मंत्र नित्य करे ये फलदायी है ।
आप सभी धर्मप्रेमी जनो पर महालक्ष्मी की सदैव कृपा हो यही प्रार्थना सह … श्री मात्रेय नमः







