परिषद की बैठक में अस्वीकार किए गए प्रस्ताव पुनः पीआईसी में लेना गलत परंपरा : नेहा उइके
पीआईसी की पहली बैठक में 49 प्रस्ताव, भाजपा पार्षदों के वार्डों का एक भी नहीं
घोड़ाडोंगरी । नगर परिषद के साधारण सम्मेलन की बैठक में विपक्षी पार्षदों की आपत्ति के बाद निरस्त कर दिए गए प्रस्ताव 15 दिन के भीतर ही पुनः पीआईसी की बैठक के एजेंडे में शामिल कर लिए गए। यह ठीक परंपरा नहीं है। भाजपा पार्षद श्रीमती नेहा दीपक उइके ने इस मामले में अधिकारियों को नियमानुसार काम करने के लिए चेताते हुए कहा की भाजपा पार्षदों एवं उनके वार्डों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएमओ, अध्यक्ष एवं पीआईसी का व्यवहार सभी वार्डों के लिए एक समान होना चाहिए। इसमें भेदभाव होने पर वे चुप नहीं बैठेंगे और नगरीय प्रशासन मंत्री से मिलकर सारे मामले की जांच एवं कार्यवाही की मांग भी करेंगी। वार्ड नंबर 11 के पार्षद सुरेंद्र सोनू चौहान ने बताया कि परिषद के साधारण सम्मेलन के पूर्व सीएमओ एवं उपयंत्री द्वारा सभी पार्षदों से उनके वार्डों के विकास कार्यों के अधिकतम तीन-चार प्रस्ताव मांगे गए थे जिस पर अधिकांश पार्षदों ने अपने वार्ड के 3-4 प्रस्ताव ही दिए थे। नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती मीरावंती उइके ने भी अपने वार्ड के मात्र 4 प्रस्ताव ही दिए थे। लेकिन बैठक का एजेंडा जब सामने आया तो उसमें उपाध्यक्ष के वार्ड नंबर 5 के 9 कार्यों के प्रस्ताव दिखाई पड़े। इस पर साधारण सम्मेलन की बैठक के दौरान समस्त विपक्षी पार्षदों ने आपत्ति ली तो वार्ड 5 के चार काम छोड़कर शेष 5 प्रस्ताव परिषद द्वारा निरस्त कर दिए गए थे। लेकिन निरस्त कर दिए गए प्रस्तावों में से अधिकांश प्रस्ताव आज होने वाली पीआईसी की बैठक में पुनः शामिल कर लिए गए हैं जो कि नियम विरुद्ध है।
पीआईसी की पहली बैठक में 49 प्रस्ताव, भाजपा पार्षदों के वार्डों का एक भी नहीं
आज होने वाली पीआईसी की पहली बैठक में कुल 49 प्रस्ताव शामिल किए गए हैं लेकिन इसमें शामिल विकास कार्यों के प्रस्तावों मैं भाजपा पार्षदों के वार्डो का एक भी प्रस्ताव नहीं है। इस पर आपत्ति जताते हुए भाजपा पार्षद नेहा दीपक उईके ने कहा की अधिकारियों एवं पीआईसी का यह रुख ठीक नहीं है। भाजपा पार्षदों के वार्डो की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीआईसी के एजेंडे में शामिल लगभग आधे प्रस्ताव केवल सामग्री ख़रीदी से सम्बंधित हैं। श्रीमती उइके ने चेताया है कि सामग्री खरीदी के मामले में अधिकारी अपने हाथ बचाकर काम करें। बाजार मूल्य से अधिक दर पर और बिना पारदर्शिता बरते यदि कोई खरीदी की गई तो कार्यवाही का सामना करने के लिए भी तैयार रहें।