व्यंग्य “पांडरीढाना बना देश का सबसे पहला वार्ड, जो शताब्दी वर्ष 2047 में प्रवेश का शंखनाद कर चुका है।
पांडरीढाना का धुआंधार विकास बन सकता है देश का रोल मॉडल । गणतंत्र दिवस पर दूरदर्शी इंजीनियर हो सकते हैं, सम्मानित।
बैतूल जिले की खेड़ी सांवलीगढ़ पंचायत ने प्रभावशाली लोगों और अधिक आवाजाही वाले वार्डों की मांग को दरकिनार कर आदिवासी बहुल पांडरीढाना में पहले सीमेंट रोड बनाकर साबित कर दिया कि वह अंत्योदय की सच्ची हितैषी है और अंतिम पंक्ति के लोगों के साथ खड़ी है। अंत्योदय का अर्थ अंत उदय, सबसे अंतिम व्यक्ति का भी उदय। मतलब समाज की सबसे अंतिम पंक्ति में खड़े, सबसे गरीब, सबसे वंचित व्यक्ति तक विकास और कल्याण पहुंचाना। यह खेड़ीवासियों के लिए गर्व की बात होना चाहिए कि उनकी पंचायत ने गरीब लोगों के दर्द और जरूरत को समझा और प्राथमिकता दी। यह पंचायत की बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि पूर्व सरपंच कौशल्या बाई जो खुद आदिवासी वर्ग की हैं, वह अपने 7 वर्ष के कार्यकाल में अपने निवास वार्ड में सीमेंट रोड नहीं बनवा पाई थीं। इसलिए यह और भी बड़ी बात थी। पंचायत को खुले मंच से इस सड़क के बारे में बताना था। यही नहीं, हर एक मतदाता को एक बार नहीं, बार बार बताना चाहिए था। किन्तु आश्चर्य की बात है कि ऐसा नही हुआ।
ऐसा अभूतपूर्व काम करके तो हर नेता गली गली में लाउडस्पीकर लगाकर बताते हैं, देखो भाइयों बहनों, हमने बेमिसाल काम करके दिखाया है। लेकिन खेड़ी पंचायत तो संत महात्मा निकली। इतना बड़ा पुण्य करके भी एकदम खामोश। मानों हिमालय पर समाधि लगा ली हो। हो सकता है पंचायत ढिंढोरा नहीं पीटना चाहती हो, सोचा होगा नेकी कर दरिया में डाल और आगे बढ़। धन्य हो खेड़ी पंचायत, धन्य हो इंजीनियर साहब!
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हमने सोचा, चलों पंचायत ने मंच से नहीं बताया तो क्या हुआ, RTI में पूछ लेते हैं। आखिर कागज तो बोलता है। क्योंकि RTI में तो पांडरीढाना में बनाए शानदार सीमेंट रोड की जानकारी नियमानुसार देने के लिए पंचायत बाध्य है। पर यहाँ तो कागज ने भी मौन व्रत धर लिया। पंचायत अपनी ओर से बता नहीं रही और RTI में पंचायत के साथ साथ जनपद भी जानकारी नहीं दे रही तो इससे संदेह और सवाल तो उठेगा कि आखिर जानकारी क्यों छुपाई जा रही है। अंततः अब राज्य सूचना आयोग म.प्र.से फरियाद की है।
उड़ती खबरों से पता चला है कि पंचायत को आशंका है कि इतने पवित्र उददेश्य से बनाये रोड को भूलकर लोग दूसरी खोजबीन में न लग जाये। क्योंकि यह रोड कोई ऐसी वैसी रोड नहीं है। मोहल्ला खत्म….. आबादी खत्म……. मकान भी खत्म…….. फिर भी रोड बनता गया…… बनता गया….. बनता गया….। बिना आबादी के 150 फीट आगे तक बनकर अपने टारगेट को साध करके ही रुका! लोगों को कहने का मौका मिल गया, रोड किनारे किसकी जमीन है इधर, कौन प्लाट बेच रहा इधर, कौन कालोनी के सपने देख रहा है इधर, आनन फानन में कौन कौन से सौदे हुए है इधर आदि आदि। लेकिन यह आम लोगों की आम सोच है, लेकिन पंचायत की सोच अलग ही लेबल की पता चली….
अपुष्ट राज खुला, कि पंचायत बहुत दूरदर्शी है. उसने आज वालों के लिए ही नहीं, भविष्य में प्लॉट लेकर मकान बनाने वालों के लिए एडवांस में यह रोड बनाई है। पहले लोग घर बनाते थे फिर रोड मांगते थे। पंचायत ने आम लोंगो की इस पीढ़ा के इतिहास को संज्ञान में लिया होगा कि उम्र गुजर जाती रही है मकान तक पहुँव मार्ग बनवाने में आम लोगों की। पीढ़ीयां बदल जाती थी, पर रोड नही बन पाता था। अतः शताब्दी वर्ष में सबसे पहले प्रवेश के लिए ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पंचायत ने नीति ही पलट दी। अब पहले रोड फिर मकान।
इसप्रकार पहले रोड बनाकर घर बनाने वालों को शताब्दी वर्ष का एडवांस तोहफा पंचायत की ओर से दिया गया। क्या फयूचर प्लानिंग है पंचायत की। इंजीनियर साहब सबसे ज्यादा बधाई के पात्र हैं। क्योंकि आप सरकारी भी हैं और नियमों के जानकार भी है और नियमों का पालन करना और कराना भी आपका ही काम है। आपने दो दशक दूर का भविष्य देख लिया, जो आम लोग चश्मा लगाकर भी नहीं देख सकते। धन्य हो इंजीनियर साहब ! NASA वालों को भी आपसे ट्यूशन लेना चाहिए। ऐसी दूरदर्शिता, ऐसी नाप जोख, ऐसा नक्शा, कमाल है आपका। जनता के धन का इससे बेहतर उपयोग भविष्य के लिए और क्या ही हो सकता ।
लोग कहते रहे, लोगों का काम है कहना। जहां लोग नहीं, वहां रोड, जहां रोड है, वहां हिसाब नहीं। वाह रे विकास। आसपास के खेतवालों ने तो पंचायत और इंजीनियर साहब को भर भरकर दुआएं दी होगी और आगे भी बरसों तक लेते देते रहेंगे। उनकी तो किस्मत ही खुल गई। रातोंरात कृषि भूमि सोना उगलने वाली बना दी गई। ये तो आम के आम और गुठलियों के दाम जैसा हो गया। कुछ तो यह भी कह रहे… तीर एक….. निशाने अनेक ।
मेरी तो मांग है, 26 जनवरी को दिल्ली में इस महान दूरदर्शिता के लिए इंजीनियर सहाब और उनकी टीम को राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए और PM साहब को मंच से कहना चाहिए, देश के इंजीनियरों, पंचायत वालों, सीखों इनसे कुछ। जहां लोग 2026 में जी रहे हैं, वहां खेड़ी पंचायत 2047 के विकसित भारत की ओर पहला कदम रख चुकी है। देखों जाकर खेड़ी पंचायत के इंजीनियर साहब ने 2026 में ही 2047 वाली दूरदर्शी रोड बना दी है।
यह लेखक के निजी विचार है
