शरीर को स्वस्थ रखना है तो प्रकृति के करीब लौटना होगा : डॉ. नवीन वागद्रे

 

 

डिटॉक्सिफिकेशन स्वस्थ जीवन की पहली सीढ़ी, शरीर को स्वस्थ रखना है तो प्रकृति के करीब लौटना होगा : डॉ. नवीन वागद्रे

बैतूल। गौ ग्राम संस्कृति संरक्षण समिति (GGSS) के तत्वावधान में परम तपस्वी संत श्री श्री १००८ निकूदास जी महाराज ध्यान एवं साधना केंद्र, रानीपुर आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय “मनःशांति एवं शरीर शुद्धि” योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं आध्यात्मिक शिविर का सोमवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस आवासीय शिविर में प्रतिभागियों ने योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं समग्र स्वास्थ्य से जुड़ी अनेक उपचार पद्धतियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया।

समापन दिवस पर डिटॉक्सिफिकेशन (शरीर की आंतरिक शुद्धि) विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर डॉ. नवीन वागद्रे एवं उनकी टीम ने बताया कि जिस प्रकार किसी मशीन की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए समय-समय पर उसकी सर्विसिंग आवश्यक होती है, उसी प्रकार मानव शरीर को भी समय-समय पर प्राकृतिक रूप से शुद्ध (डिटॉक्स) करने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि अनियमित दिनचर्या, तनाव, जंक फूड, नींद की कमी एवं प्रदूषण के कारण शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) जमा होने लगते हैं, जो आगे चलकर अनेक जीवनशैली जनित रोगों का कारण बनते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक बार प्राकृतिक डिटॉक्स कार्यक्रम का लाभ अवश्य लेना चाहिए।

शिविर के दौरान डॉ. नवीन वागद्रे एवं उनकी टीम ने स्पष्ट किया कि यह शिविर केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभागियों को प्राकृतिक चिकित्सा की विभिन्न उपचार पद्धतियों का प्रत्यक्ष उपचार एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। शिविर में मिट्टी पट्टी एवं मिट्टी लेप, हॉट फुट बाथ, यज्ञ चिकित्सा, भक्ति योग, योगासन, प्राणायाम, ध्यान, जूस थेरेपी, व्हीटग्रास जूस, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, कपिंग थेरेपी, मसाज थेरेपी, ऑरिकुलोथेरेपी, सु-जोक थेरेपी सहित अनेक प्राकृतिक उपचारों का लाभ प्रतिभागियों को प्रदान किया गया।

समापन दिवस का विशेष आकर्षण कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) रही। डॉ. वागद्रे ने बताया कि यह थेरेपी रक्तसंचार को बेहतर बनाने, मांसपेशियों के तनाव को कम करने, सर्वाइकल, कमर एवं कंधे के दर्द जैसी समस्याओं में राहत देने तथा शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करने में प्रभावी मानी जाती है। इस दौरान प्रतिभागियों को कपिंग थेरेपी का व्यावहारिक अनुभव भी कराया गया।

डॉ. नवीन वागद्रे ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा में “आहार ही औषधि” का सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति एवं रोग की स्थिति के अनुसार संतुलित एवं प्राकृतिक आहार निर्धारित किया जाता है। यदि व्यक्ति सही भोजन, सही समय पर और सही मात्रा में ग्रहण करे तो अनेक रोगों की रोकथाम और उपचार स्वाभाविक रूप से संभव है। उन्होंने कहा कि दवा से अधिक आवश्यक है सही जीवनशैली, संतुलित आहार और प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जीना।

समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने “एक प्रतिभागी–एक पौधा” अभियान के अंतर्गत रानीपुर आश्रम परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। सभी ने पौधों की देखभाल करने तथा स्वस्थ जीवन के साथ-साथ हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प भी लिया।

शिविर के सफल संचालन में डॉ. नवीन वागद्रे की टीम के सदस्य परमेंद्र साहू, उपासना बारस्कर, प्रतीक्षा वागद्रे, धर्मी सेलू, भवेश टेकपुरे, कार्तिक साहू, अंकित कापसे, प्रीतम एवं यादव ने सक्रिय भूमिका निभाई।

समापन अवसर पर आयोजकों ने बताया कि डॉ. नवीन वागद्रे के मार्गदर्शन में समय-समय पर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं समग्र स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर स्वस्थ, संतुलित और निरोग जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।

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