*जनपद अध्यक्ष का धरना सातवें दिन भी जारी, CEO पर भेदभाव व कार्यों में बाधा के गंभीर आरोप*

 

 

 

*19 जुलाई को सामाजिक संगठनों से समर्थन की अपील, प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग*

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मूलचन्द मेधोनिया पत्रकार भोपाल

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*चीचली / गाडरवारा* जनपद पंचायत चीचली की अध्यक्ष श्रीमती राधा अहिरवार का जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) अभिषेक गुप्ता के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को सातवें दिन भी जारी रहा। जनपद कार्यालय के सामने चल रहे इस आंदोलन में समर्थक लगातार शामिल हो रहे हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि उनकी शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उन्हें आंदोलन जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

 

धरने के दौरान जारी किए गए ज्ञापन में जनपद अध्यक्ष ने CEO पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति वर्ग से निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता तथा जातिगत भेदभाव और उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया जाता है। उनका आरोप है कि इससे न केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

 

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि जनहित से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को अध्यक्ष को जानकारी देने से रोका जाता है। ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर अध्यक्ष के पास पहुंचते हैं, लेकिन समाधान के बजाय उन्हें टाल दिया जाता है।

 

अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं की जातीं और कई महत्वपूर्ण विकास कार्य लंबित पड़े हैं। सचिवों के वेतन से कथित रूप से अनुचित कटौती, संबल योजना के प्रकरणों में देरी, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भुगतान लंबित रखने, अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में विलंब तथा पंचायतों से विभिन्न कार्यों के नाम पर कथित आर्थिक मांग जैसे आरोप भी ज्ञापन में शामिल किए गए हैं।

 

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्यालय की महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय तक लंबित रखी जाती हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। इसके अलावा पूर्व ग्राम पंचायत सचिव गणेशप्रसाद कोरव के मामले का भी उल्लेख करते हुए संवेदनहीनता बरतने का आरोप लगाया गया है।

 

धरना स्थल से जारी अपील में अध्यक्ष ने 19 जुलाई 2026 (रविवार) को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग सहित सभी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों और नागरिकों से बड़ी संख्या में पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देने की अपील की है।

 

धरना समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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