छठ पूजा : छठपूजा दुनिया का एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें उगते सूर्य भगवान की पूजा होती है।
उगते और डूबते सूर्य की अर्ध्य देते हुए शुरू होने वाला पूर्वी व उतरी भारत के सबसे बड़ा महापर्व #छठपूजा दुनिया का एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें उगते सूर्य भगवान की पूजा होती है।
छठ पूजा का त्योहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, वैसे तो छठ महापर्व मुख रूप से उतर भारत के राज्यों में मनाया जाता है, लेकिन अब यह त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता हैं, क्योंकि भारत मूल के दुनिया में कही रहते हैं तो छठ व्रत जरूर करते हैं।
सबसे प्राचीन वेदव ऋगवेद, में भी सूर्यपासना के इस महापर्व छठ पूजा का जिक्र आता है, वैदिक काल में ऋषियों ने भोजन से दूर रहकर सूर्य से ऊर्जा शक्ति प्राप्त करने के लिए यह छठ व्रत करते थे।
भूलोक तथा द्यलोक के मध्य में अंतरिक्ष लोक है, इस द्यलोक में सूर्य भगवान नक्षत्र तारों के के मध्य में विराजमान रह कर तीनों लोकों को प्रकाशित करते हैं।
इसी प्रत्यक्ष सूर्य की छठ पूजा की समय उपासना होती है
भगवान सूर्य के नाम: रवि, दिनकर, दिवाकर, भानु, भास्कर, प्रभाकर, सविता, दिनमणि, आदित्य, अनंत, मार्तड, अर्क, पतंग, और विवस्वान है।
वेदों के अनुसार सूर्य जगत की आत्मा है और सूर्य की उपासना ही सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
पौराणिक काल मे भगवान सूर्य की उपासकों में सुग्रीव के भाई बलि का नाम भी लिया जाता हैं, जो प्रतिदिन सूर्य आराधना करते थे। द्वापर युग मे दानवीर कर्ण भी भगवान सूर्य का उपासक ही थे।
इसी तरह शास्त्रों में माता षष्ठी देवी को भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्री माना गया है, इन्हें ही माँ कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि के दिन होती है, षष्ठी देवी माँ को ही पूर्वी भारत उत्तरप्रदेश, बिहार, और झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहते हैं।
छठी माता की पूजा का उल्लेख ब्रह्मावैवर्त, पुराण में भी मिलता हैं।
छठ पूजा का व्रत का प्रारंभ हिन्दू माह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि से होता है, और षष्टि तिथि को कठिन व्रत रखा जाता है, तथा दूसरे दिन सप्तमी तिथि को पारण होता है। सनातन हिंदू धर्म के सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा माना जाता है, क्योंकि 4 दिनों तक चलने वाला पर्व है छठ महापर्व







