अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित
*भारतीय संस्कृति और विशेषतः साहित्य के क्षेत्र में वाचिक परम्परा ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। भारतीय काव्य किसी न किसी रूप में वाचिक संस्कार से अभी तक सुवसित है। श्रुति की रक्षा भी इसी परम्परा से हो रही है और कविता जनमानस के हृदय से सीधा संवाद कर रही है । जगह जगह हो रहे काव्य अनुष्ठान यथा कवि सम्मेलन और कवि समागम इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।*
*ऐसा ही एक आयोजन विगत दिवस 02 अक्टूबर 2022 को देश के प्रबुद्ध साहित्यकार और विगत वर्ष के प्रतिष्ठित महमूद ज़की पुरुस्कार से सम्मानित वरिष्ठतम शायर आदरणीय संतोष जैन जी के आदेश एवं मार्गदर्शन पर राजकुमार कोरी राज़ जी की अगुआई में और पंकज जैन अंगार जी की गरिमामय उपस्थिति में जैन साहब के गृहगनगर घोड़ाडोंगरी में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के रूप में आयोजित हुआ ।
नवदुर्गा उत्सव में एकता दुर्गा उत्सव समिति घोड़ाडोंगरी के तत्वावधान में आयोजित इस काव्य यज्ञ में काव्यशास्त्र के नौ रसों के साथ नौ कवियों ने अपनी समिधा अर्पित की । इस कवि सम्मेलन में भाग लेने वाले कवियों में आदरणीय संतोष जैन जी के साथ आदरणीय राजकुमार कोरी राज़ जी (बैतूल), आदरणीय पंकज जैन अंगार जी (ललितपुर), आदरणीय मनोज शुक्ल हिंदुस्तानी जी(शाहपुर), दीपक साहू सरस जी (मुलताई), सुश्री सुनीता पटेल (जबलपुर), विनोद सनोडिया अंजान (अमरवाड़ा), नीरज नेमा निर्भीक (हर्रई) और कुमार नितेश नैश (भोपाल) रहे ।
संचालन की जिम्मेदारी मुझ अकिंचन को सौंपी गई । मां सिंहवाहिनी के दरबार में पूजन अर्चन पश्चात आदरणीय मनोज शुक्ल जी के सुरीले स्वर में मां हंसवाहिनी और मां भारती की वंदना के साथ प्रारम्भ हुए इस कवि सम्मेलन में पहली समिधा अर्पित की अमरवाड़ा से पधारे कवि विनोद अंजान जी ने।अपने चुटीले अंदाज से आरंभ हुआ उनका काव्यपाठ अत्यंत कर्ण प्रिय गीत के साथ संपन्न हुआ और सच कहा जाए तो इस उत्कृष्ठ प्रस्तुति ने आयोजन को जो ऊंचाई प्रदान की उसी ने कार्यक्रम की सफलता की नींव रख दी थी ।
जिंदाबाद भाई अंजान जी। हर्रई से आए ओजस्वी कवि नीरज निर्भीक ने अगले क्रम में अपने प्रभावशाली काव्यपाठ से इसे और अधिक सुनिश्चित कर दिया । निर्भीक जी की रचनाओं में ओज का सर्वाधिक निराला पक्ष परिलक्षित होता है जो की वर्तमान मंचो के पारंपरिक काव्य से थोड़ा हटकर है, रचनाओं में व्यर्थ की भावना भड़काने वाली बातें न रखकर यथार्थ और संचेतना को पेश करने की उनकी कला दुर्लभ है। पश्चात इसके आए मुलताई से पधारे आदरप्रिय दीपक साहू सरस जी, जिन्होंने अपने काव्यपाठ में अपने दो दशकों का अनुभव समेटकर श्रोताओं को बार बार हंसने और खिलखिलाने पर विवश कर दिया ।
जब तक उनका काव्यपाठ चला तब तक सारे पंडाल में सिर्फ कहकहो की आवाज गूंजती रही। दीपक जी न केवल मंचो के जादूगर है बल्कि श्रोताओं के साथ शब्दो से खेलना उन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है । जबलपुर से आई बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न कवयित्री सुनीता पटेल जो न केवल एक अच्छी पत्रकार, समाचार के डिजिटल माध्यम में न्यूज एंकर, कुशल संचालक, प्रखर वक्ता और प्रसिद्ध कवयित्री है उन्होंने अपने काव्यपाठ से शानदार आयोजन में चार चांद लगा दिए ।
चिरपरिचित दिलकश मुस्कान के साथ प्रस्तुत श्रंगार, ओज, सामाजिक, समसामयिक के साथ साथ उनका हास्य का काकटेल निश्चित ही श्रोता लंबे समय तक याद रखने वाले है। अत्यंत सुरीले और अपनी वृहद सामाजिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में अत्यधिक लोकप्रिय कवि श्री मनोज शुक्ल जी ने अपने बेटी विषय पर आधारित गीत से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया साथ ही उनकी व्यंग्य रचना ने उन्हें गुदगुदाया भी । इसके पश्चात मेरे द्वारा काव्य पाठ को भी मंच और पंडाल दोनो ओर से जो स्नेह मिला वो मेरे लिए विशेष उपलब्धि रही । मुक्तकों और एक गजल के साथ ही मेरे द्वारा प्रस्तुत राम गीत को श्रोताओं का जो स्नेह मिला है वो मेरे लिए यादगार अनुभव रहा
जिसे में हमेशा अपनी स्मृति मंजूषा में सुरक्षित रखना चाहूंगा। अब बारी आती है मंच के शिखर त्रमूर्ति के प्रथम स्तंभ पंकज अंगार जी की, लालित्य और प्रेम से सराबोर उनके मुक्तकों ने जहां युवा श्रोतावर्ग के हृदय को स्पंदित किया बल्कि वरिष्ठ श्रोताओं को भी मुस्कराने पर मजबूर कर दिया । उन्हें मुक्तकों का राजकुमार क्यों कहा जाता है इसकी बानगी भी घोड़ाडोंगरी की जनता ने देखी। मां भारती की वंदना और देशप्रेम से रचा बसा उनका गीत एक लड़की में देखा मैनें पूरा हिंदुस्तान को जिस मुग्धभाव से श्रोताओं ने सुना वो दृश्य अद्भुत था ।
जनता के आग्रह पर पढ़े हुए बेटी विषय की रचना से भावविभोर हुए श्रोता पंकज जी और उनकी रचनाओं की स्मृति अवश्य साथ ले गए होंगे ऐसा मुझे विश्वास है। सभी कवियों की अगुआई कर रहे आदरणीय राजकुमार कोरी राज़ जी ने अपना काव्यपाठ घनाक्षरी से प्रारंभ किया । अपनी जादुई आवाज और शब्दो के उत्तमोत्तम संयोजन से सजी धजी अपनी रचनाओं के प्रभावी काव्यपाठ से उन्होंने सम्मेलन को आशातीत ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया । गज़ल को जिस अदब और मुहब्बत से सुना जाता है वैसा ही माहौल घोड़ाडोंगरी की जनता से मिला । संक्षिप्त किंतु उत्कृष्ठ काव्यपाठ के लिए जाने जाने वाले राज जी ने यहां भी अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।
काव्य यज्ञ का शिखर कलश रखा आदरणीय संतोष जैन साहब ने अपनी चिर प्रसिद्ध रचनाओं के माध्यम से उन्होंने जो समां बांधा है वो अद्भुत रहा । काव्यपाठ के दौरान फरमाइशों का दौर भी चलता रहा और उन्होंने श्रोताओं के आग्रह पर अपनी “यार बीड़ी जला” और फिर “जो बात इधर है वो उधर है की नही है” भी सुनाई । देर तक तालिया और वाहवाही का यह दौर चलता रहा ।
कार्यक्रम के अध्यक्ष समीर पाठक जी के समापन उद्बोधन के साथ समाप्त हुए कवि सम्मेलन में स्नेहिल भावनाओ से ओतप्रोत श्रोताओं की चेतन्य उपस्थिति और मंच की जीवंतता ने सरस्वती की हम वरद संतानों को एक यादगार शाम का हिस्सा बनने का जो अवसर उपलब्ध कराया उसने इस वर्ष के दुर्गोत्सव की सप्तमी को यादगार बना दिया।*
*बगैर किसी प्रचार प्रसार और चकाचौंध के अत्याधिक कम संसाधनों के साथ संपन्न यह कवि सम्मेलन ने जो सफलता अर्जित की उसका मूल्यांकन तो वहां की जनता ही बेहतर कर सकती है पर एक प्रतिभागी के तौर पर हम इस बात से संतुष्ट हैं की यह आयोजन श्रोताओं को आकर्षित और बांधे रखने में सक्षम रहा । और जहां कवि सम्मेलन जैसी विधा आज श्रोताओं की ओर ले जाई जा रही है हम श्रोताओं को कवि सम्मेलन की ओर लाने में सफल रहे हैं। बहुत सुंदर से स्मृति चिन्ह आयोजन समिति की ओर से अतिथि कवियों को प्रदान किए गए
हम शुक्रगुजार है आभारी है । इसके अतिरिक्त आदरणीय सैनी साहब, आदरणीय अग्रवाल जी, आदरणीय जावलकर जी, क्षेत्रीय पार्षद आदरणीय नीतू सोनी जी सहित सैकड़ों श्रोताओं की पूर्णकालिक उपस्थिति के प्रति भी हम आभारी है।* *कार्यक्रम से थोड़ा पहले जैन साहब की समृद्ध लायब्रेरी के दर्शन हुए जहां हमें उनकी कृति भेंट स्वरूप प्राप्त हुई ।