जितेन्द्र निरापुरे


लाल झंडा कोल माइन मजदूर यूनियन (सीटू) के द्वारा 15 सूत्रीय मांगों के साथ प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया सीटू पाथाखेड़ा के एरिया अध्यक्ष अशोक बुंदेला व एरिया महामंत्री जगदीश डिगरषे ने बताया कि अभी पिछली कोरोना लहर के चलते जीवन यापन के साधनों,आमदनियो को छीने जाने और बीमारी के चलते हुई बर्बादी से मेहनतकश बाहर भी नही आ पाए थे कि कोरोना की दूसरी लहर और उसके चलते लगे कोरोना कर्फ्यू ने अकल्पनीय पीड़ा,बर्बादी और मरणांतक भावनात्मक आघातों के दलदल में उन्हें फसा दिया। इस बार बरती गई लापरवाही समय पर समुचित इंतजाम न किये जाने के चलते महामारी में ऑक्सीजन, दवाओं,अस्पताल में बिस्तरों के अभाव,नकली और महंगी दवाओं की कालाबाजारी,निजी चिकित्सा संस्थानों की लूट के चलते बेशकीमती लाखो जाने चली गईं, हज्जारो बच्चे बेसहारा हो गए और करोड़ों लोगों को कंगाल,दिवालिया बना दिया गया।
इस कोरोना महामारी से निपटने के लिए कर्फ्यू लगाए गए जिनमे करोड़ो-करोड़ मेहनतकशों की आजीविका छिन गई। बीमारी का संक्रमण, महंगा इलाज,इलाज की अनुपलब्धता और आमदनी छिन जाने से करोड़ो जनता की दारुण अवस्था अकल्पनीय है। केंद्र व राज्य सरकारों ने जो नीति अपनाई उसके चलते करोड़ो लोगो की आमदनी तो चली गई लेकिन उन्हें राहत के नाम पर कुछ भी नही दिया गया। इस बार कारखानों के प्रबंधकों को भी वेतन कटौती न करने था नौकरी से न निकाले जाने के भी कोई निर्देश तक जारी नही गए।इस अवधि में फ्रंट लाइन वर्कर्स के अलावा उत्पादन, परिवहन, कार्यलय कार्य,चुनावी ड्यूटी में लोगो से काम तो लिया गया लेकिन उनकी सुरक्षा, इलाज,मुआवजा (50-50 लाख का बीमा कवर) व पुनर्वास ( विशेषतः सुनिश्चित अनुकंपा नियुक्ति) के बारे में न तो कोई स्पस्ट नीति बनाई न व्यवस्था की। परिणामतः काम के दौरान संक्रमित हुए लोग महंगा व लंबा इलाज कराने में बर्बाद तो हुए ही उनमें से बड़ी संख्या में लोग मारे भी गए इनकी मौत को भी कोरोना से हुई मौत तक नही माना गया। यह मेहनतकशों पर घोर अन्याय व अत्याचार ही है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का देश व प्रदेश में विराट बहुमत है। इनकी आजीविका तो पूरी तरह समाप्त हो गई।लेकिन उनको सुनिश्चित आर्थिक मदद व जिंदा रहने के लिए जरूरी सामग्री की किट तक उपलब्ध नही कराई गई। ऐसी स्थति में यह जरूरी है कि देश की आबादी के विराट बहुमत मेहनतकशों ( श्रमिक ,कर्मचारियों, असंगठित क्षेत्र के मजदूर,छोटे व्यवसायी, खेत मजदूर , तथा छोटे व मझोले किसान) की निम्न प्रमुख मांगो का निराकरण किया जावे:-
15 सूत्रीय मांगे;-
1-वर्तमान जनविरोधी कॉरपोरेट परस्त वैक्सिन नीति समाप्त कर देश के सभी लोगो के लिए सार्वभौमिक वैक्सिनेसन के लिए केंद्र सरकार कानूनी कदम उठाये जावे। निजी क्षेत्र के साथ सरकारी छेत्र की वैक्सिन निर्माण कंपनियों को भी उत्पादन के काम मे शामिल कर उत्पादन बढ़ावे।
2- कोविड महामारी के उफान व संभावित तीसरी लहर से मुकाबला करने हेतु समुचित अस्पताल, ऑक्सीजन युक्त पलंग,वेंटिलेटर, दवाओं के पुख्ता इंतजाम किए जावें।
3- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाया जावे तथा उसके लिए जरूरी फण्ड, स्वास्थ्य कर्मियों( डॉक्टर, नर्स,कंपाउंडर वार्ड बॉय आदि) की बड़े पैमाने पर भरती की जावे।
4- आपदा प्रबंधन कानून के तहत लॉक डॉउन,कर्फ्यू आदि लगाने के किसी भी आदेश में सभी प्रबंधकों, नियोजकों को छटनी, वेतन कटौती, आवास खाली कराने जैसे कदम न उठाने के सख्त निर्देश शामिल किये जावें।
5- पेशागत स्वास्थ्य व सुरक्षा पर बनी श्रम संहिता में समाहित कर लिये गए अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार कानून 1979 को पुनः बहाल करो।
6-चारो काली श्रम संहिताओं, तीनो काले कृषि कानूनों व विधुत अद्यादेश वापस लो।
7- कोरोना का प्रभाव रहने तक ( संभावित तीसरी,चौथी लहर को दृष्टिगत रखते हुए) सभी गैर आयकर दाता परिवारों को 7500 रुपयों प्रति माह नगद राशि तथा प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 10 किलो अनाज निशुल्क दिया जावे।
8- सभी सरकारी अस्पतालों में गैर कोविड मरीजो को भी प्रभावशाली इलाज मुहैया करवाया जाय।
9- कोरोना महामारी से मुकाबला करने में लगे सभी फ्रंट लाइन वर्करों ( आंगनवाड़ी, आशा आशा सहयोगी) अन्य कर्मियों को सुरक्षा उपकरण, मास्क,पीपीई किट आदि मुहैया कराने के साथ व्यापक बीमा कवच प्रदान किया जावे।
10- केंद्र व राज्य सरकारों के विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती की जावे तथा बड़ी संख्या में वर्षो से कार्यरत सभी संविदा कर्मी दैनिक वेतनभोगी कार्यभारित आंगनबाड़ी, आशा- आशा सहयोगनी, मध्यान्ह भोजनकर्मियो सहित तमाम योजनकर्मियो को संबंधित विभागों का नियमित सरकारी कर्मचारी बनाकर वेतन व सुविधाएं दी जावे।
11- मध्यप्रदेश में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण का काम तुरंत शुरू कर न्यूनतम वेतन 21000 रुपये वेतन करो।
12- सेल्स प्रमोशन एम्पलाइज एक्ट के स्वतंत्र अस्तित्व व स्वरुप में परिवर्तन करना बंद कर इसके सभी प्रावधानों के सुनिश्चित अमल के निर्देश जारी करो।
13- सरकारी और निजी क्षेत्र की उत्पादन इकाइयों में जारी ठेका पद्धति समाप्त कर सभी को नियमित श्रमिक बनाकर उन्हें वेतन,भत्ते व अन्य सुविधाओं सहित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जावे,श्रम कानूनों का पालन करते हुए उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जावे,कोरोना अवधि में मारे गए श्रमिको कर्मचारियों को 50 लाख रुपया दिये जाने की योजना का लाभ दिया जावे।
14- ट्रांसपोर्ट छेत्र में कार्यरत लाखो ड्राइवर्स, कंडक्टर्स,हेल्पर्स की सेवाओं,वेतन,सुरक्षा सहित इलाज के पुख्ता इंतजाम करने के साथ काम के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने पर 50 लाख का बीमा कवरेज व उनके परिजनों के सुनिश्चित रोजगार की व्यवस्था करो। कोरोना महामारी से मुकाबला करने में इनकी अग्रणीय भूमिका के लिए उन्हें भी कोरोना योद्धा मान कर सभी अधिकार व सुरक्षा प्रदान की जावे। तथा लॉक डॉउन के कारण हुई वेतन हानि की भरपाई राज्य सरकारें अपने खजाने से करावें।
15- मॉडल मंडी एक्ट वापस लो तथा कृषि मंडियों में कार्यरत सभी हम्माल,पल्लेदारों को 21 हजार रुपये मासिक की सुनिश्चित आमदनी,कल्याण योजनाओं का लाभ देने के साथ सभी छेत्रो में कार्यरत हम्माल,पल्लेदारों के लिए श्रमिक कल्याण मंडल की तरह कल्याण मंडल बनाकर उन जैसी सभी कल्याण योजनाओं को लागू करो।
आज की विरोध कार्यवाही में प्रमुख रूप से उपस्थिति उल्लेखनीय रही।