लुटियन और खान मार्केट गिरोह का प्रधानमंत्री मोदी की इमेज को बिगाड़ने का प्रयास विफल हो गया।
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इजराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि आप इज़राइल में सबसे लोकप्रिय व्यक्ति हैं; कृप्या आये, और मेरी पार्टी ज्वाइन कर ले।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सार्वजानिक मंच से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने देश के लिए निश्चित रूप से असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं। फिर आगे कहा कि हमारे पास एक सूर्य है, एक विश्व है, एक (बिजली की) ग्रिड है, और एक नरेंद्र मोदी है।

मेरे पास समय-समय पर जानकारी आती रहती है कि विश्व के नेतृत्व ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा में मीटिंग में क्या कहा। लिखता नहीं था क्योंकि लोगों को विश्वास नहीं होता और मेरे पास प्रमाण नहीं था।

सामान्यतः मैं इस प्रशंसा के बारे में नहीं लिखता। लेकिन इस लेख का एक सन्दर्भ है।

यूरोप एवं अमेरिका के प्रमुख समाचारपत्रों एवं न्यूज़ चैनल ने अघोषित रूप से प्रधानमंत्री मोदी के कार्य एवं उपलब्धियों बारे में प्रतिबंध लगा रखा है। अगर कभी कुछ छापा या टेलीकास्ट किया, तो नकारात्मक समाचारों को ही आगे बढ़ाया है। यह प्रतिबंध 370 – 35A के उन्मूलन एवं CAA लाने के बाद से लगाया गया है। दिसंबर 2019 से अब तक प्रधानमंत्री मोदी का एक भी फोटोग्राफ नहीं; एक भी समाचार आर्थिक सुधारो या भारत की आर्थिक प्रगति के बारे में नहीं छापा गया। प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रपति बाइडेन एवं उपराष्ट्रपति हैरिस से द्विपक्षीय वार्ता को एकदम गोल मार गए जहाँ इन दोनों नेताओ ने प्रधानमंत्री मोदी की बहुतायत से प्रशंसा की थी। कोरोना वैक्सीन का भारत में उत्पादन, सौ करोड़ कोरोना वैक्सीन लगाना, एवं डेल्टा वायरल स्ट्रेन को दो महीने में रोकने (अमेरिका में अभी भी डेल्टा वायरल स्ट्रेन से प्रतिदिन 1500 मृत्यु हो रही है) के बारे में चुप्पी साध गए। अगर कुछ लिखा तो नेगेटिव एंगल से लिखा, जैसे वैक्सीन की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाना।

एक भी समाचार पश्चिम बंगाल की प्रायोजित हिंसा पर नहीं छपा। फर्जी किसानो द्वारा एक दलित की क्रूर हत्या को छुपा दिया गया। बांग्लादेश की हिंसा पर इक्का-दुक्का समाचार, वह भी भारत को हिंसा के लिए ब्लेम करते हुए, छापकर इतिश्री कर ली। हर नेगेटिव समाचार के लिए घोर मोदी विरोधी एवं कट्टर कांग्रेस समर्थक भारतीय मूल के प्रोफेसर एवं व्यक्तियों के प्रायोजित कोट का सहारा लिया गया।

साथ ही एक अन्य मोर्चे से वार किया जा रहा था। विश्व के NGO भारत को लोकतंत्र, भुखमरी, सुख (हैप्पीनेस), प्रेस फ्रीडम, पारदर्शिता इत्यादि जैसे सूचकांकों पर भारत की रैंक को योजनाबद्ध तरीके से गिराते जा रहे थे। यहाँ तक कि वर्ष 2020 की पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी) इंडेक्स में भारत को बोत्सवाना से कई पायदान नीचे दिखाया गया था, जबकि उस समय बोत्सवाना अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग (FATF) की ग्रे लिस्ट में था। दोनों बाते तो सही नहीं हो सकती – या तो आप भारत से अधिक पारदर्शी है, या फिर पारदर्शी नहीं होने के कारण ग्रे लिस्ट में है। लोकतंत्र, हैप्पीनेस एवं प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत को कई देशो से नीचे दिखाया गया जहाँ संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक या पीसकीपिंग मिशन है, यानि कि उन देशो में लोकतंत्र, हैप्पीनेस एवं प्रेस फ्रीडम के साथ भारी समस्या है। हैप्पीनेस एवं भुखमरी इंडेक्स में उन देशों से नीचे दिखाया है जहाँ के नागरिक अपने देश में भुखमरी एवं अप्रसन्नता के कारण भारत में अनियमित रूप से घुसने को बैचेन है।

ऐसे अप्रोच का एक कारण यह भी है कि पिछले महीने समाचार आया था कि ऑस्ट्रिया के चांसलर (प्रधानमंत्री के समकक्ष) सेबेस्टियन कुर्ज़ ने अपने आप को पार्टी नेता घोषित करवाने के लिए फेवरेबल समाचार छपवाने के लिए वित्त मंत्रालय में एक मित्र उच्च अधिकारी से समाचारपत्रों को करोड़ों रुपये के विज्ञापन दिलवाए थे। यही नहीं, ओपिनियन पोल वालो को सर्वे के लिए प्रश्न बतलाया जाता था और फिर अपने समर्थन में कृत्रिम रूप से आंकड़े बढ़ाकर समय-समय पर सर्वाधिक पॉपुलर घोषित करवा दिया जाता था। इस फर्जीवाड़े का असर यह हुआ कि कुर्ज़ अपनी पार्टी के नेता चुन लिए गए और बाद में चुनावो में विजय के बाद चांसलर। यानि कि समाचारपत्र में कवरेज चुनाव हरा या जिता सकती है। इस स्कैंडल के कारण कुर्ज़ को चांसलर के पद से त्यागपत्र देना पड़ा।

अतः देश तोड़क शक्तियों ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में भी यही चाल चली। इनका आईडिया था कि इतनी नेगेटिव कवरेज करवाओ कि प्रधानमंत्री मोदी इन शक्तियों से समझौता कर ले या फिर उनकी विश्वसनीयता विश्व, विशेषकर भारत, में समाप्त हो जाए। तभी यह शक्तियां राष्ट्रपति बाइडेन के सत्ता में आने के बाद उत्साहित थी और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के पारिवारिक सदस्य का उपयोग प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में कर रही थी।

लेकिन विश्व नेतृत्व को पता है कि प्रधानमंत्री मोदी क्या कर रहे है और भारत में क्या हो रहा है। कारण यह है कि उनके दूतावास एवं ख़ुफ़िया तंत्र अपनी राजधानी को विस्तार से वस्तुस्थिति से अवगत कराते रहते है। तभी विश्व के नेतागण प्रधानमंत्री मोदी का दोनों हाथों से स्वागत कर रहे है और विश्व के उद्यमी भारत में निवेश कर रहे है। उदाहरण के लिए, भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार देख लीजिए।

क्या भुखमरी से जूझ रहे राष्ट्र के नेता को कोई राष्ट्र सीरियसली लेता है? अंतरराष्ट्रीय मंचो पर ऐसे राष्ट्र के नेता के हाथ में केवल एक कटोरा होता है। उदाहरण भारत के निकट ही मिल जाएगा।

तभी प्रधानमंत्री मोदी ने जून 2019 में इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि “मोदी की छवि, दिल्ली के खान मार्किट के गैंग ने नहीं बनायीं है, लुट्येन्स दिल्ली ने नहीं बनायीं है। 45 साल की मोदी की तपस्या ने छवि बनायीं है….”।
अमित सिंघल