*संघ ने जैन संत के सान्निध्य मे मनाया गुरु पूर्णिमा पर्व*

*गुरु मानव जीवन के शिल्पकार हैं*

*आचार्य मुनि उपशांत सागर जी महाराज ने बताया गुरु का महत्व*

*जितेन्द्र निगम -चिचोली*

 

*सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने नगर मे चातुर्मास कर रहे जैन संत आचार्य मुनि उपशांत सागर महाराज जी के सान्निध्य मे भक्ति भाव से गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया. नगर स्थित जैन संत निवास में कार्यक्रम का प्रारंभ

स्थानीय संघ परिवार ने विधिवत ध्वज पूजन एवं भारत माता ,गुरुजी ,डॉ हेडगेवार जी के छाया चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर किया.*

*इस कार्यक्रम मे जैन संत मुनि उपरांत सागर महाराज जी ने गुरु की महत्ता बताते हुए कहा कि पूरे विश्व में यदि कोई गुरु है तो वह भारत एवं भारत की संस्कृति है. गुरु के बिना हमारा जीवन अंधकार मय है . इसलिए हमें आवश्यकता है

किसी ना किसी गुरु की जो जीवन पथ प्रदर्शित करे. गुरु एक प्रकार से शिल्पकार हैं . गुरु हमारे आराध्य हैं . प्रत्येक व्यक्ति का गुरु के प्रति समर्पण भाव बुद्धि से नहीं बल्कि हृदय से होना चाहिए . जो गुरु के प्रति समर्पण भाव रखता है उसका जीवन भर कल्याण होता है . मुनि श्री ने आगे बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा हमें जीवन मे अनुशासन मे समर्पण भाव से कैसा जीना है यह सिखाती है.

जैन संत निवास में आयोजित गुरु पूर्णिमा पर्व में बड़ी संख्या में स्थानीय संघ परिवार के लोग मौजूद रहे.*