*श्रावण मास विशेष*
*शिव के गले मे सर्प क्यों*

भगवान शिव गले में सर्पों की माला पहनते हैं मगर अपनी शांति का त्याग नहीं करते। सर्पों की माला धारण करना अर्थात अनेक मुश्किलों को अपने ऊपर ले लेना। जीवन है तो मुश्किलें तो आएँगी फर्क सिर्फ इतना है कि जो उन्हें हँसके सह लेता है वह शिव बन जाता है और जो उन्हें नहीं सह पाता वह शव बन जाता है।
मुश्किलों का समाधान उससे मुकर जाना नहीं है अपितु मुस्कुराकर उनका सामना करना है। कठिनाइयों से जूझते हुए आप अपने चेहरे पर मुस्कान लाने की हिम्मत जुटा पाते हैं तो समझ लेना कि फिर आपकी शान्ति भंग करने की किसी में सामर्थ्य नहीं।

भगवान शिव के गले में सर्प हमें यह सन्देश देते हैं कि मुश्किलें तो किसी को भी नहीं छोड़ती बस आप अपनी हिम्मत और मुस्कान मत छोड़ना।

ज़मीर जिन्दा रख, कबीर जिंदा रख,
राजा भी बन जाये तो,
दिल में फकीर जिंदा रख,

हौसले के तरकश में,
कोशिश का वो तीर जिंदा रख,
हार जा चाहे जिंदगी में सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख।