शिखा क्यू रखी जाती हैं? व इसके रखने से फायदे ।

नवीन वागद्रे गुजरमाल
मुंडन के समय सिर के बीचो बीच छोड़ा हुआ एक बालों का गुच्छा जिसे फिर कभी नहीं कटाया जाता है, उसे शिखा कहा जाता है। यह शिखा हिंदुओं का एक प्रतीक चिन्ह भी है जिसे चोटी, भी कहते है । शिखा शब्द की उत्पत्ति शिखी शब्द से हुयी है जिसका एक अर्थ अग्नि है वही दूसरा अर्थ ज्ञान है और शिखा रखने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।
शिखा को जीवन का आधार माना गया है, मस्तिष्क के भीतर जहां पर बालों का आवर्त या भंवर होता है उस स्थान पर नाड़ियों का मेल होता है, जिसे अधिपति मर्म कहा जाता है। यह स्थान बहुत ही नाजुक होता है जिस पर चोट लगने पर व्यक्ति की तुरंत मृत्यु हो सकती है। शिखा में गांठ लगाने पर वह इस स्थान पर कवच के जैसे कार्य करती है, यह तीव्र सर्दी और गर्मी से इस स्थान को सुरक्षित रखने के साथ ही चोट लगने से भी बचाव करती है।

शिखा बंधन मस्तिष्क की उर्जा तरंगों की रक्षा कर व्यक्ति की आत्मशक्ति बढ़ाता है।
पूजा पाठ के समय शिखा में गांठ लगाकर रखने से मस्तिष्क में संकलित ऊर्जा तरंगे बाहर नहीं निकल पाती है और वह अंतर्मुखी हो जाती है। इनके अंतर्मुखी हो जाने से मानसिक शक्तियों को पोषण, सद्बुद्धि, सद्विचार आदि की प्राप्ति वहीं वासना की कमी, आत्मशक्ति में बढ़ोतरी, शारीरिक शक्ति का संचार, अनिष्टकर प्रभाव से रक्षा, सुरक्षित नेत्र ज्योति, कार्यों में सफलता जैसे अनेक लाभ मिलते हैं।

शिखा रखने के महत्व
शिखा ज्ञान प्राप्त करने का और अपनी देह को स्वस्थ रखने का उत्तम माध्यम है। सुश्रुत संहिता के अनुसार मस्तक के ऊपर सिर पर जहां भी बालों का भंवर होता है, वहां संपूर्ण नाड़ियों व संधियों का मेल होता है, जिससे इस स्थान को अधिपतिमर्म कहा जाता है।
मन बुद्धि और शरीर को नियंत्रण करने में भी सहायक है शरीर के सात चक्रों में सहस्त्रार चक्र इसी स्थान पर होता है जहा शिखा रखी जाती है। शिखा रखने से सहस्त्रार चक्र को जागृत करने और शरीर बुद्धि व मन को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

जिस स्थान पर चोटी या शिखा होती है वह स्थान अन्य जगहों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होता है वहीं पर इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़िया होती है। यह मेरुदंड (स्पाईनल कॉड) से होकर मस्तिष्क तक पहुंचती है। इस नाड़ी के मस्तिष्क में मिलने के स्थान पर शिखा बांधी जाती है। शिखा बंधन मस्तिष्क की ऊर्जा तरंगों की रक्षा कर आत्मशक्ति बढ़ाता है। इसी स्थान के कारण वातावरण से उस्मा व अन्य ब्रह्मांड की विद्युत चुंबकीय तरंगे मस्तिक से सरलता से आदान प्रदान कर लेती है। इस स्थान पर शिखा रखने से मस्तिष्क के यथोचित उपयोग के लिए नियंत्रित ताप प्राप्त होता है।

विज्ञान के अनुसार शिखा वाला भाग जिसके नीचे सुषुम्ना नाड़ी होती है। जो कपाल तंत्र के अन्य खुली जगहों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होती है। जिसे खुली होने के कारण वातावरण से ऊष्मा और अन्य ब्रह्मांडीय विद्युत चुंबकीय तरंगों का मस्तिष्क से आदान-प्रदान बहुत आसानी से हो जाता है।