नवीन वागद्रे

नेचुरोपैथी तथा योग में प्रैक्टिशनर नवीन वागद्रे ने बताया कि योग संस्कृत भाषा के ‘युज धातु’ से निकला है जिसका अर्थ होता है जोड़ अर्थात् आत्मा का परमात्मा से मिलन / जोड़ अर्थात योग में इतनी शक्ति होती है, कि यह आपको अमरत्व की प्राप्ति करा सकता है।

कुछ लोग योग को भृमवश साधारण आसान व्यायाम समझ लेते हैं । किन्तु यह उनसे कहीं बढ़कर है।
योग मुख्य रूप से एक आध्यात्मिक अनुशासन है, जिसमे जीवन शैली का पूर्णसार आत्मसात किया जा सकता है। योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इस लिए इसे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह हमारे जीवन से जुड़े भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक, आदि सभी पहलुओं पर काम करता है। तथा उन्होंने यह भी बताया कि इस कोरोना महामारी के समय में हम कैसे योग चिकित्सा करके अपने आप को स्वस्थ रख सकते है ।

षट्कर्म: प्रत्येक पांचवें दिन करने वाले अभ्यास।।
1 नेति क्रिया
2 कुंजल क्रिया

प्रतिदिन करने वाले अभ्यास

1 कपालभाति क्रिया
2 अग्निसार क्रिया
3 नस्य = दोनों नासिका छिद्रों में पांच-पांच बूंद 100% देसी नस्ल की गौ माता का शुद्ध घृत/अणुतैलम या षडबिंदु तैलम डालें।
👉(नस्य की संपूर्ण प्रक्रिया में लगभग 5 से 7 मिनट नासिका के स्थान पर मुख से श्वास लें।)

योगासन : सूर्य नमस्कार – कफ शोधन एवं श्वसन संस्थान को सुदृढ़ करने हेतु अति प्रभावी अभ्यास। इसके अतिरिक्त
उड्डीयान बंध, जालन्धर बन्ध,विपरीतकरणी मुद्रा, तड़ागी मुद्रा तथा प्राणायाम में अनुलोम-विलोम प्राणायाम, सूर्यभेदन प्राणायाम,भ्रामरी प्राणायाम जरूर करना चाहिए।