मत्स्य कृषक और मछुआरों के लिए अनेक योजनाएं – लाभ लेने की अपील
      मत्स्य पालन से जुड़े कृषकों तथा मत्स्य पालन करने के इच्छुक जिले के व्यक्तियों के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 मे भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने हेतु कार्यालय सहायक संचालक मत्स्योद्योग में आवेदन आमंत्रित किये गये है।
इच्छुक मत्स्य पालक/व्यक्ति मत्स्य विभाग में संपर्क कर विभिन्न योजनाएं जैसे मत्स्य बीज उत्पादन हेतु हैचरी निर्माण, संवर्धन पोंड निर्माण, नवीन तालाब निर्माण, मत्स्य पालन हेतु इनपुट्स की व्यवस्था, जलाशय में मत्स्य बीज फिंगरलिंग संचयन, रंगीन मछलियों की रियरिंग एवं ब्रीडिंग ईकाई स्थापना, मत्स्य मार्केटिंग हेतु क्योस्क, मोटरसाईकिल विथ आईस बाक्स, साईकिल विथ आईस बाक्स, रेफ्रीजरेटर व्हीकल, इंसुलेटेड व्हीकल, जलाशय में केज/पेज स्थापना, फिश फीड मिल प्लांट, आईस प्लांट, बायोफ्लोक प्लांट, आर.ए.एस. यूनिट, इत्यादि योजनाओं का लाभ ले सकते है।
योजना में सम्मिलित गतिविधियों का लाभ लेने हेतु इच्छुक व्यक्ति/मत्स्य समिति/समूह कार्यालय सहायक संचालक मत्स्योद्योग में 30 अक्टूबर 2021 तक आवेदन कर सकते है। क्लस्टर आधारित तथा पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर हितग्राहियों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।
खेतों में मछली पालन हेतु तालाब बनवाने आवेदन आमंत्रित
   सहायक संचालक मत्स्योद्योग श्री श्री महेंद्र सिंह परिहार ने जानकारी दी है कि भारत सरकार व मध्य प्रदेश शासन के सहयोग से प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना शहडोल जिले में भी लागू है। जिसके तहत जिले के सभी किसान जिनको अपने खेत पर मछली पालने हेतु तालाब बनवाने हो, आवेदन पत्र आमंत्रित कर सकते हैं। आवेदन पत्र के साथ जमीन का नक्शा, खसरा, ऋण पुस्तिका की कॉपी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति के साथ-साथ मिट्टी परीक्षण की जलधारा क्षमता की रिपोर्ट के साथ विकासखंड में पदस्थ मत्स्य विभाग के अधिकारी या जिला कार्यालय को दें। उन्होंने बताया कि उपयंत्री के साथ स्थल निरीक्षण के पश्चात तालाब बनवाने हेतु उचित पाए जाने पर उनका नाम सूची में शामिल कर उनको तालाब बनाए जाने हेतु आदेश दिया जाएगा तथा तालाब बन जाने पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व महिला चाहे किसी जाति की हो, लागत 1.00 हेक्टेयर 7.50 का 60  प्रतिशत पिछड़ा व सामान्य पुरुष को 40% अनुदान उनके खाते में भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाकी राशि किसान स्वयं या बैंक से ऋण लेकर पूरा कर सकता है। सहायक संचालक ने कृषकों से अधिक से अधिक शामिल होकर इस योजना का लाभ उठाकर मछली पालन हेतु आह्वान किया है।