ओलंपिक खेलों में एक रजत और एक कांस्‍य पदक के साथ भारत 61वें स्‍थान पर है। चीन 24 स्‍वर्ण पदक सहित कुल 52 पदकों के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर हैं। 20 स्वर्ण के साथ अमरीका दूसरे और 17 स्वर्ण लेकर जापान तीसरे स्‍थान पर है।

पी. वी. सिंधु ने कांस्य के साथ जीता 135 करोड़ लोगों का दिल

पी.वी. सिंधु यानी सफलता की गारंटी। कुछ खिलाड़ी होते हैं, जिनके नाम से उनका खेल पहचाना जाता है। जैसे क्रिकेट में सचिन तेंडुलकर, हॉकी में मेजर ध्यानचंद, शतरंज में विश्वनाथ आनंद, दौड़ में मिल्खा सिंह। उसी तरह टोक्यो में कांस्य पदक जीतकर पी.वी. सिंधु ने भी बैडमिंटन के लिए अपने नाम की दस्तक दे दी है। सिंधु, जिस टूर्नामेंट में कोर्ट पर उतरी, गले में पदक पहन कर निकलना उनका रिवाज हो गया है। पिछले पांच सालों से सिंधु, दुनिया की हर बैडमिंटन प्रतियोगिया में जिस तरीके से भारतीय तिरंगे का नेतृत्व कर रही हैं, वह न सिर्फ काबिल-ए-तारीफ है अपितु एतिहासिक है। जिस प्रकार व्यक्ति और उसकी छाया हमेशा साथ होती है उसी प्रकार सिंधु और नए रिकॉर्ड्स एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इतिहास और सिंधु का साथ चोली-दामन का साथ हो गया है।

सिंधु का रियो से टोक्यो तक का सफर

टोक्यो ओलंपिक में भले ही उन्हें कांस्य से संतोष करना पड़ा हो, लेकिन जीते उन्होंने 135 करोड़ दिल हैं। लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली पीवी सिंधु पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। भारत की तरफ से बैडमिंटन में अब तक कुल 3 मेडल आए हैं उनमें से एक सायना नेहवाल और 2 पदक सिंधु ने अपने नाम किए हैं। ये दोनों खिलाड़ी 2008 में स्थापित पुलेला गोपीचन्द की अकादमी की पैदाइश हैं। 2016 में रियो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली सिंधु से इस बार स्वर्ण की उम्मीद थी। इतने बड़े टूर्नामेंट में लगातार पदक जीतना भी छोटी बात नहीं हैं। मीराबाई चानू के बाद इस ओलंपिक में भारत का यह आधिकारिक रूप से दूसरा पदक है।

कैसा रहा कांस्य पदक का मैच

एक तेज, फिट और चालाक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ, पीवी सिंधु अपनी पूरी क्षमता के साथ खेलने उतरी। कांस्य पदक के लिए होने वाले इस मैच में सिंधु के प्रतिद्वंदी के पास खोने के लिए कुछ नहीं था। क्वाटर फाइनल में मिली उस हार ने सिंधु को झकझोर कर रख दिया था। सिंधु ने कहा “मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे इस बात का दुख होना चाहिए कि मैंने फाइनल खेलने का मौका गंवा दिया, या खुश हूं कि मेरे पास पदक जीतने के लिए एक और मौका है।” लेकिन फिर कोच ने मुझे पोडियम पर खड़े होने की खुशी की याद करने को कहा, इसके बाद मैंने पदक के रंग की परवाह नहीं की।

चीनी प्रतिद्वंद्वी ने सिंधु के खिलाफ तेज बॉडी स्मैश से मुकाबला करने की कोशिश की, जैसा कि उस खिलाड़ी में क्वार्टर फाइनल में यामागुची के खिलाफ दिखाया था। लेकिन सिंधु पहले से तैयार थीं। सिंधु ने पहला गेम बिना किसी परेशानी के अपने नाम किया। दूसरे गेम को चीनी खिलाड़ी ने लंबा खींचने की कोशिश की लेकिन सिंधु ने संयम से खेला। मध्य-खेल के ब्रेक तक स्कोर नेक-टू-नेक बना रहा। लेकिन फिर, सिंधु ने गेम को एकतरफा कर मैच अपने नाम कर लिया।

सिंधु के एतिहासिक कारनामे

सिंधु ने 2014 में एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों की नजरों में आईं। इसके बाद उन्होंने एक ही वर्ष ​​में राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित किया। सिंधु ने 2014 में ही अपना पहला वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल भी जीता था। वर्ल्ड चैंपियनशिप में 1 स्वर्ण सहित सिंधु कुल 5 पदक अपने नाम कर चुकी हैं।

सिंधु 2016 के ओलंपिक खेलों में जब खेलने उतरी तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि वो कोई पदक जीत सकेंगी। उस ओलंपिक में रजत जीतकर उन्होंने सबको चकित कर दिया। टोक्यो ओलंपिक में देश को उनसे उम्मीदें थी, जिसे उन्होंने पूरा किया। सिंधु, ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी भी है। साइना नेहवाल ओलंपिक में बैडमिंटन पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, जब उन्होंने 2008 में बीजिंग में कांस्य पदक जीता था। सिंधु ने 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण जीता और इसके बाद 2019 में विश्व चैंपियनशिप में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता, ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय बनीं।

प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी का भी दिल जीतने में हैं माहिर

अपने तीसरे ओलंपिक में, ताई त्ज़ु-यिंग को रविवार को टोक्यो ओलंपिक के फाइनल में चीन की चेन युफेई से हार का सामना करना पड़ा। इस कारण उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ताई त्ज़ु-यिंग ने महिला एकल में स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूटने के बाद अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘पीवी सिंधु ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और कहा कि वह इसके बारे में सब जानती हैं। आखिर 2016 में सिंधु को भी इससे गुजरी थीं। यह सुनकर मुझे सुकून और खुशी मिली।’