नेशनल लोक अदालत ने पति पत्नी के रिश्ते को पुनः जीवित किया
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लोक अदालत आम पक्षकारों को कैसे सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करता है इसका ताजा उदाहरण आज जिला न्यायालय बैतूल में आयोजित नेशनल लोक अदालत में देखने को मिला। जहां पति पत्नी आज न्यायालय में अपने प्रकरण की पेशी में अलग-अलग आए थे लेकिन एक साथ घर वापस हुए। कुटुंब न्यायालय के समक्ष आवेदिका ने एक आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता का अनावेदक पति के विरुद्ध इस आशय से लगाया था कि उनका विवाह सन 2000 में हुआ था विवाह के पश्चात आ वेदिका को एक पुत्र तथा एक पुत्री का जन्म हुआ ।आवेदिका का कहना है कि शादी के पश्चात से ही उसके पति, ननंद, देवर तथा सास-ससुर के द्वारा उसे उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे तथा गंदी गंदी गाली गलौज कर कहते थे कि शादी में दहेज लेकर नहीं आई हो जाओ और अपने परिवार से ₹500000 दहेज लेकर आओ तभी अच्छे से रखेंगे।

आवेदिका का यह भी कहना था कि सन 2015 में उसके पेट में गोला हुआ था जिसका नागपुर के श्री राम हॉस्पिटल में इलाज करवाया गया था जहां उसके पति ने उसका कोई खर्च नहीं उठाया लगभग ₹200000 आ वेदिका की माता एवं भाई के द्वारा उसके इलाज में खर्च किया गया था। आवेदिका ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति उसके बच्चों पर कोई ध्यान नहीं देता है उसका पुत्र 12वीं में तथा पुत्री छठवीं कक्षा में अध्ययनरत है। आवेदक के द्वारा भरण पोषण का कोई भी ध्यान नहीं रखा जाता है, आवेदिका के पास अपने जीविका का कोई भी साधन नहीं है तथा वह अपने माता-पिता पर पूरी तरह से आश्रित है।

प्रकरण के तथ्यों को देखते हुए कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री राजीव कर्महे द्वारा प्रकरण के दोनों पक्षकारों के साथ बैठक आहूत की गई तथा उनके बच्चों के भविष्य का हवाला देते हुए। उन्हें प्रकरण में राजीनामा किए जाने हेतु समझाइश दी गई, परिणाम स्वरूप आज नेशनल लोक अदालत में प्रकरण के दोनों पक्ष कार पति पत्नी एक साथ जीवन यापन करने के लिए तैयार हुए। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अफसर जावेद खान, कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री राजीव कर्महे, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री आदेश कुमार मालवीय के द्वारा दोनों पक्षकार गणों को फूल माला पहनाकर सुखी जीवन यापन किए जाने हेतु प्रेरित किया गया तथा उनके प्रकरण को नेशनल लोक अदालत में आपसी राजीनामे से निराकृत करते हुए समाप्त घोषित किया गया।