निजीकरण के विरोध मे सीटू के काली पट्टी बांधकर किया विरोध

जितेन्द्र निरापुरे पाथाखेड़ा

पाथाखेड़ा । सीटू के एरिया महामंत्री जगदीश डिगरसे ने बताया कि आवश्यक प्रतिरक्षा सेवा अयादेश , 2021 – हड़ताल के बुनियादी अधिकार पर हमला इस अध्यादेश के खिलाफ 23 जुलाई विरोध दिवस बनाया गया ।

सरकार ने मजदूर वर्ग पर चौतरफा हमला छेड़ रखा है । 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार काली श्रम संहिताओं के जरिये मजदूर वर्ग के अधिकारों व सुविधाओं पर सीधा हमला हो रहा है ।

सरकार ने सीधे मजदूरों के संघर्ष के अधिकार पर हमला शुरू कर दिया है । देश भर के रक्षा क्षेत्र के कर्मी आयुध निर्माणी बोर्ड के निजीकरण के विरोध में हड़ताल की तैयारी में |

तो उनकी हड़ताल को कुचलने के लिए सरकार ने आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 ‘ थोपा दिया ।

इस अध्यादेश का प्रभाव | केवल रक्षा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है , बल्कि इसके तानाशाहीपूर्ण प्रावधानों को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है ।

यह अध्यादेश | सभी श्रम अधिकारों को खत्म करने में काली श्रम संहिताओं के प्रावधानों से भी बहुत आगे निकल गया है ।

आने वाले दिनों में | | सरकार की ओर से ऐसे ही और अध्यादेश या कार्यकारी आदेश लाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है ।

दूसरी ओर इस | कॉर्पोरेट परस्त व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ सीटू समेत तमाम केंद्रीय श्रमिक संगठनों का तीखा संघर्ष भी जारी है । ,

हड़ताल के बुनियादी अधिकारों पर हमला : मोदी शासन ने , अपनी तानाशाहीपूर्ण विचारधारा पर चलते हुए , आवश्यक प्रतिरक्षा | सेवा अध्यादेश , 2021 को लागू कर , अध्यादेश के रास्ते एस्मा जैसा कठोर अधिनियम लागू किया है ।

कहने को इस अध्यादेश को आवश्यक प्रतिरक्षा सेवाओं को बनाए रखने के बहाने से जारी किया है ।

लेकिन वास्तव में यह प्रतिरक्षा क्षेत्र के सभी | असैन्य कर्मचारियों के फेडरेशनों के केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जारी विरोध को दबाने और उनकी हड़ताल पर प्रतिबन्ध लगाने के | लिए किया गया है ।

ज्ञातव्य हो कि देशभर के प्रतिरक्षा कर्मचारी फेडरेशन , आयुध निर्माणी बोर्ड ( ओएफबी ) को खत्म कर देश भर में स्थित 41 आयुध कारखानों को सात कम्पनियों में निगमीकरण करके अंततः निजीकरण का रास्ता बनाने के खिलाफ प्रतिरोध कर रहे हैं ।

सरकार | का यह कदम , अपने असंवैधानिक और संदिग्ध चरित्र के साथ श्रम कानूनों के खात्मे के कदमों से भी आगे निकल गया है ।

साफ तौर | पर इसका उद्देश्य सरकार की विनाशकारी नीतियों और विशेष रूप से निजीकरण की उन्मादी मुहिम के खिलाफ मजदूर वर्ग के सभी प्रकार के विरोध और संगठित प्रतिरोध का गला घोंटना है ।

आवश्यक प्रतिरक्षा सेवा अध्यादेश , 2021 को 30 जून , 2021 की मध्यरात्रि को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया ।

जब | संसद के मानसून सत्र की बैठका 9 जुलाई , 2021 से होने वाली थी , तब मोदी सरकार की गजट अधिसूचना में कटाक्षपूर्ण तौर पर कहा गया कि संतुष्ट हैं कि अध्यादेश के लिए परिस्थिति मौजूद है और संसद का सत्र नहीं चल रहा है ।

हमें याद रखना चाहिए कि यह अध्यादेश , आयुध निर्माणी बोर्ड को भंग करने के जरिये केन्द्र द्वारा प्रतिरक्षा उत्पादन व सेवा क्षेत्र में आमूल – चूल बदलाव की घोषणा के कुछ ही हफ्तों बाद और आयुध निर्माणी बोर्ड के निगमीकरण के विरोध में 26 जुलाई से प्रतिरक्षा क्षेत्र के असैन्य कर्मचारियों की होने वाली हड़ताल की सम्भावना के चलते लाया गया है ।

सामूहिक कार्रवाईयों पर प्रतिबन्ध लगाने का उद्देश्य ,, सीटू के एरिया महामंत्री जगदीश डिगरसे ने बताया कि यह अध्यादेश केवल प्रतिरक्षा कर्मचारी फेडरेशनों के संयुक्त मंच के द्वारा , | निगमीकरण के रास्ते आयुध कारखानों के निजीकरण के सत्यानाशी निर्णय का विरोध करने को रोकने के लिए ही नहीं लाया गया है । इसका | उद्देश्य तो मजदूरों और उनकी ट्रेड यूनियनों की हड़ताल सहित लगभग सभी सामूहिक कार्रवाईयों पर प्रतिबन्ध लगाने का है ।