The Governor of Nagaland, Shri R.N. Ravi calling on the Prime Minister, Shri Narendra Modi, in New Delhi on August 08, 2019.

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी 26 मई 2014 से अब तक लगातार दूसरी बार वे भारत के प्रधानमन्त्री बने हैं तथा वाराणसी से लोकसभा सांसद भी चुने गये हैं। वे भारत के प्रधानमन्त्री पद पर आसीन होने वाले स्वतन्त्र भारत में जन्मे प्रथम व्यक्ति हैं। इससे पहले वे 7 अक्तूबर 2001 से 22 मई 2014 तक गुजरात राज्य के मुख्यमन्त्री रह चुके हैं। विकिपीडिया
जन्म की तारीख और समय: 17 सितंबर 1950 (आयु 71 वर्ष), वड़नगर
राष्ट्रीयता: भारतीय
पत्नी: जशोदाबेन मोदी (विवा. 1968)
फ़िल्में: 100 Years of Chrysostom
शिक्षा: गुजरात युनिवर्सिटी (1983), युनिवर्सिटी ऑफ़ दिल्ली (1978), ज़्यादा
भाई: प्रहलाद मोदी, अमृत मोदी, पंकज मोदी, वसंतीबेन हसमुखलाल मोदी

वडनगर के एक गुजराती परिवार में पैदा हुए, मोदी ने अपने बचपन में चाय बेचने में अपने पिता की मदद की, और बाद में अपना खुद का स्टाल चलाया। आठ साल की उम्र में वे आरएसएस से जुड़े, जिसके साथ एक लंबे समय तक सम्बंधित रहे।[5] स्नातक होने के बाद उन्होंने अपने घर छोड़ दिया। मोदी ने दो साल तक भारत भर में यात्रा की, और कई धार्मिक केन्द्रों का दौरा किया। 1969 या 1970 वे गुजरात लौटे और अहमदाबाद चले गए।[6] 1971 में वह आरएसएस के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। 1975 में देश भर में आपातकाल की स्थिति के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए छिपना पड़ा। 1985 में वे बीजेपी से जुड़े और 2001 तक पार्टी पदानुक्रम के भीतर कई पदों पर कार्य किया, जहाँ से वे धीरे धीरे भाजपा में सचिव के पद पर पहुँचे।[7]

गुजरात भूकम्प २००१, (भुज में भूकंप) के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के असफल स्वास्थ्य और ख़राब सार्वजनिक छवि के कारण नरेंद्र मोदी को 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। मोदी जल्द ही विधायी विधानसभा के लिए चुने गए। 2002 के गुजरात दंगों में उनके प्रशासन को कठोर माना गया है, इस दौरान उनके संचालन की आलोचना भी हुई।[8] हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) को अभियोजन पक्ष की कार्यवाही शुरू करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला।[9] मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी नीतियों को आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए श्रेय दिया गया।[10]

वे गुजरात राज्य के 14वें मुख्यमन्त्री रहे। उन्हें उनके काम के कारण गुजरात की जनता ने लगातार 4 बार (2001 से 2014 तक) मुख्यमन्त्री चुना। गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त नरेन्द्र मोदी विकास पुरुष के नाम से जाने जाते हैं और वर्तमान समय में देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं॥[11] टाइम पत्रिका ने मोदी को पर्सन ऑफ़ द ईयर 2013 के 42 उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया है।[12]

अटल बिहारी वाजपेयी की तरह नरेन्द्र मोदी एक राजनेता और कवि हैं। वे गुजराती भाषा के अलावा हिन्दी में भी देशप्रेम से ओतप्रोत कविताएँ लिखते हैं।[13][14]

उनके नेतृत्व में भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा और 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की।[15] एक सांसद के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी एवं अपने गृहराज्य गुजरात के वडोदरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा और दोनों जगह से जीत दर्ज़ की।[16][17] उनके राज में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एवं बुनियादी सुविधाओं पर खर्च तेज़ी से बढ़ा।[18] उन्होंने अफसरशाही में कई सुधार किये तथा योजना आयोग को हटाकर नीति आयोग का गठन किया।[19]

इसके बाद वर्ष 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने उनके नेतृत्त्व में दोबारा चुनाव लड़ा और इस बार पहले से भी ज्यादा बड़ी जीत हासिल हुई। पार्टी ने कुल 303 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा के समर्थक दलों यानी एनडीए को कुल 352 सीटें प्राप्त हुईं।[20] 30 मई 2019 को शपथ ग्रहण कर नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।[21]

2019 के आम चुनाव में उनकी पार्टी की जीत के बाद, उनके प्रशासन ने जम्मू और कश्मीर की विशेष राज्य का दर्जा को रद्द कर दिया। उनके प्रशासन ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, २०१९ भी पेश किया, जिसके परिणामस्वरूप देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। मोदी अपने हिंदू राष्ट्रवादी विश्वासों और 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उनकी कथित भूमिका पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का एक आंकड़ा बना हुआ है,[22] जिसे एक बहिष्कारवादी सामाजिक एजेंडे के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया गया है। मोदी के कार्यकाल में, भारत ने लोकतांत्रिक बैकस्लेडिंग का अनुभव किया है।

राजनीति के आकाश में धूमकेतु की तरह चमकते सितारे नरेंद्र मोदी

मोदी जी का सफर फर्श से अर्श पर पहुंचने की अद्भुत दास्तान है. नरेंद्र मोदी राजनीति के शीर्ष पर पहुंचने वाले उन गिने-चुने राजनेताओं में से हैं, जिन्होंने अपना सफर एक कार्यकर्ता के रूप में प्रारंभ किया. फिर पहले मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री बने.जब तक राज्य की राजनीति में रहे तब तक वहां उनका कोई विकल्प नहीं था और जब उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में दस्तक दी तब भी वह एकमात्र विकल्प खुद ही हैं. नरेन्द्र मोदी ने लगातार यह साबित किया है कि देश की राजनीतिक का नब्ज पकड़ने मंक उनका कोई सानी नहीं है. चाहे भाषण देने की कला हो, राजनीतिक मुद्दे तय करने हों या फिर सोशल प्लेटफार्म का उपयोग, दूसरे दलों/नेताओं से मीलों आगे रहने की कला वर्तमान भारतीय राजनीति में उनसे बेहतर कोई नहीं जानता. नरेन्द्र मोदी देश के सियासत के आकाश में धूमकेतु की तरह 20 वर्षो से अनवरत चमकते सितारे हैं, अपराजेय योद्धा हैं.दुनिया के सबसे चर्चित राजनेता नरेंद्र मोदी आज 71 साल के हो गए हैं. 2014 से पार्टी मोदी के जन्मदिन को सेवा सप्ताह दिवस के रूप में मनाती रही है. मोदी जी के अनवरत जनसेवा का 20 वर्ष पूरा हो रहा है.साल 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी को पार्टी ने प्रधानमंत्री का चेहरा बनाकर पेश किया. इसी बदौलत भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया.

वहीं वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव की जीत 2014 से भी बड़ी थी. 2019 में मिली दुबारा जीत यह साबित करती है कि वर्षो तक सड़ती-गलती रही सरकारी मशीनरी को पटरी पर लाने के लिए देश की जनता के लिए नरेन्द्र मोदी से बड़ा व विश्वसनीय दूसरा कोई राजनेता फिलहाल नहीं है. पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. पीएम मोदी की लोकप्रियता हर दिन के साथ बढ़ती गई. आज उनके समकक्ष दूर-दूर तक विपक्ष के पास कोई नेता मौजूद नहीं है.स्वच्छता के प्रति अलख जगाने वाली स्वच्छ भारत अभियान, आजादी के बाद आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए पहली बार खोले गए जन-धन अकाउंट, बेटी बचाओ बेटी पढा़ओ, उज्ज्वला गैस योजना, हर घर को छत, हर घर तक बिजली पहुंचाने वाली सौभाग्य योजना, घर-घर शौचालय का निर्माण, स्वास्थ्य हेतु आयुष्मान भारत एवं आरोग्य सेतु, रोजगार की दिशा में स्टार्टअप एवं मेक इन इंडिया आदि जैसी जन-कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतारने की लंबी फेहरिस्त मोदी सरकार के नाम दर्ज है. इन योजनाओं को प्रारम्भ कर सरकार ने गरीबों, दलितों, पिछड़ों, युवाओं, महिलाओं आदि के लिए विकास के नए मार्ग प्रशस्त किए. आजादी के 70 वर्षों के बाद भी बिजली से वंचित 18,000 गांवों में बिजली पहुंचाई गई. अब तक 35 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले गए. 8 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को उज्जवला योजना के कारण धुएं से मुक्ति मिली.

इसके अलावा 70 साल से आर्टिकल 370 की जंजीरों में जकड़े जम्मू-काश्मीर को इससे मुक्ति दिलाकर अनुच्छेद-370 और धारा-35 ए को समाप्त किया. अब जम्मू काश्मीर के सरकारी कार्यालयों में अलग झंडा की बजाय तिरंगा शान से लहरा रहा है. मोदी सरकार के इस फैसले के बाद कश्मीर में एक देश, एक विधान और एक निशान लागू हो गया है. वहीं तीन तलाक जैसे काली प्रथा से मुस्लिम महिलाओं को आजादी दिलाना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत ऐतिहसिक कदम है. मुस्लिम महिलाओं को आत्मसम्मान के साथ जीने का हक देने का श्रेय मोदी सरकार को ही प्राप्त है. नागरिक संशोधन कानून बनाना मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि है. इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिन्दु, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई आदि शरणार्थी को भारत की नागरिकता प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त हो गया.