‘अधूरा इश्क, अधूरी कहानी’, समाज में लोगों की प्रेम के प्रति सोच को दिखाती है ये किताब युवा पत्रकार दीपक राजसुमन की अभी हाल में एक किताब आई है ‘अधूरा इश्क, अधूरी कहानी’। ये किताब कॉलेज के लड़के-लड़कियों के ऊपर आधारित है। आज के नौजवान के अपने सपने होते हैं। कुछ बड़ा करने का लक्ष्य होता है, लेकिन जब वो कॉलेज के दरवाजे पर दस्तक देते है तो सबकुछ भूल कर इश्क-मोहब्बत के चक्कर में पड़कर रह जाते हैं। हमारे देश में इश्क करना दीवार की जंजीर तोड़ने जैसा है। कभी धर्म की दीवार तो कभी जाति की दीवार। आप किसी के साथ मोहब्बत कर तो लेते हैं, लेकिन इसका अंजाम क्या होगा? किसी को नहीं पता होता है।

ऐसी ही कई कहानियों का संग्रह है ये किताब- ‘अधूरा इश्क, अधूरी कहानी’। ऐसी ही एक कहानी है, जिसमें एक प्रेमी अपने प्यार को पाने के लिए किस तरह से समाज में लड़ता है। अपने प्यार को हासिल करता है। वहीं इसमें एक कहानी ऐसा भी है जब एक लड़की के लिए लड़का अपना सब कुछ गवां देता है लेकिन लड़की जीते जी उस लड़के के प्यार को नहीं समझ पाती। इस किताब में प्यार है, दर्द है, रोमांस है, अधूरापन है।‘अधूरा इश्क, अधूरी कहानी’ ऑथर्स ट्री पब्लिशिंग के द्वारा प्रकाशित की गई है। इस किताब को लेकर दीपक कहते हैं कि जब उन्होंने इस किताब को लिखने की शुरुआत की तो उनकी दोस्त मुस्कान ने पूछा था कि दीपक तुम इस किताब के लिए इस तरह का नाम ‘अधूरा इश्क, अधूरी कहानी’ ही क्यों सोचे हो। जिसपर दीपक ने जवाब दिया था कि ये किताब हर उस व्यक्ति के लिए होगी। जिन्होंने कभी ना कभी किसी ना किसी से इश्क किया है।

आज भले ही वो उम्र के किसी भी मोड़ में होंगे, लेकिन ये किताब को पढ़कर अपने गुजरे हुए दिनों को याद करेंगे। उन गीतों को गुनगुनाएंगे जो कभी अपने प्यार के साथ ठंडी हवाओं में, कॉलेज के दिनों में गुनगुनाया करते थे, और आज जहां पुरी दुनिया कोरोना महामारी से घर में बंद है। चारों तरफ टेंशन के माहौल में जी रहे हैं। मुझे यकीन है इस समय हमारी ये किताब जरूर उन सभी को कुछ ना कुछ राहत देगी।