घोड़ाडोंगरी ।महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में वित्तीय वर्ष 2020 – 21 में बैतूल जिले में सबसे अधिक राशि घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत क्षेत्र में खर्च हुई। वित्तीय प्रदर्शन में सबसे अधिक राशि खर्च कर जिले की 10 जनपद पंचायतों में घोड़ाडोंगरी टॉप पर है ।
चिचोली जनपद पंचायत में जिले में सबसे कम राशि खर्च हुई है।

घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत क्षेत्र में वर्ष 2020 – 21 में ग्राम पंचायतों द्वारा 25 करोड़ 84 लाख रुपए खर्च किए गए।

वही चिचोली में 7 करोड़ 80 लाख रुपए खर्च किए गए ।

यह रही ग्राम पंचायतों की स्थिति

घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत क्षेत्र की 56 ग्राम पंचायतों की स्थिति देखे तो इस 1 वर्ष में मनरेगा योजना के तहत सबसे कम राशि ग्राम पंचायत छुरी में 5 लाख ₹16 हजार खर्च किए गए ।

सबसे अधिक राशि चोपना में एक करोड़ 44 लाख रुपए खर्च किए गए ।दूसरे नंबर पर बटकीडोह में एक करोड़ 32 लाख रुपए खर्च किए गए।

सुखाढाना में एक करोड़ 10 लाख रुपए खर्च किए गए ।

सीवनपाट र्में एक करोड़ ₹2 लाख खर्च किए गए ।कान्हावाडी में 92 लाख ,रामपुर में 92 लाख ख़र्च किये गए। वही पांढरा में 91 लाख 2020 – 21 के ओर 30 लाख 2019 – 20 के कुल 1 करोड़ 20 लाख खर्च किये गए।
खदारा में 83 लॉख रुपए , खापा में 80 लाख रुपये, हीरापुर में 81 लाख रुपये, झोली मे 75 लाख रुपये, डेहरी ऑमढाना ने 73 लाख रुपये,गोलाई बुजुर्ग में 61 लाख रुपये , शक्तिगढ़ में 65 लाख रुपये, छतरपुर में 55 लाख रुपये, मेंढापानी में 67 लॉख रुपए की राशि केवल 1 वर्ष वर्ष 2020- 21 में ही खर्च की गई।

जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी की 56 ग्राम पंचायतों में केवल 18 ग्राम पंचायतों ने ही 15 करोड़ की राशि खर्च की । अन्य 38 ग्राम पंचायतों ने वर्ष भर में केवल 10 करोड़ की राशि खर्च की।

जिले में सर्वाधिक चर्चा में रहा घोड़ाडोंगरी

घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत क्षेत्र जहां जिले में सबसे अधिक राशि खर्च करने में अव्वल रहा, वही मनरेगा के तहत हुए कार्यों के कारण सर्वाधिक चर्चा का विषय भी बनी रही। यहाँ के कई ग्राम पंचायतों के लोगो ने मनरेगा के काम जेसीबी से होने पर घोड़ाडोंगरी से लेकर बेतूल तक शिकायत की। लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई। यहां के दुधावानी ग्राम पंचायत के मजदूर मनरेगा के तहत बन रहे तालाब में चल रही जेसीबी का विरोध करने गेती फावड़ा लेकर तहसील और जनपद कार्यालय पहुंचे थे । बटकीडोह ग्राम पंचायत के लोगो ने जिला पंचायत बेतूल जाकर तक शिकायत की पर कोई कार्यवाही नही हुई। ग्रामीणों ने बताया कि खेत तालाब के काम भी जेसीबी से हो रहे है।

पहली बारिश में बासपुर सहित कई ग्राम पंचायतों में डैम फूटने को लेकर भी घोड़ाडोंगरी क्षेत्र चर्चा का विषय बना रहा।

ये है जमीनी हकीकत

ग्राम पंचायत पांढरा में बनाये गए पेयजल कूप को केवल 15 फिट खोदा गया है और ढाई लाख रुपये का आहरण हो चुका है।इतनी राशि खर्च होने के बाद भी लोगो को बून्द भर पानी भी नसीब नही करा पाए।

क्या कहते है अधिकारी
जनपद सीईओ दानिश खान का कहना है मनरेगा श्रमिकों को रोजगार देने में हमारी टीम सफ़ल रही है। ज़िले में सर्वाधिक मानवदिवस सृजित किये गए है। नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम भी विकासखण्ड घोड़ाडोंगरी में चल रहा है, जिस कारण कामों की संख्या अधिक है और हम अधिक लोगों को रोजगार देने में सफ़ल हुए है।