बैतूल । जिले के आयुष्मान संबद्ध चिकित्सालयों में कोविड मरीजों को उपचार में कोई असुविधा न हो, इसकी जांच हेतु दल गठित किए गए हैं। उपरोक्त दल निरीक्षण के दौरान यह देखेंगे कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार हेतु संबद्ध चिकित्सालयों द्वारा आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत पात्र परिवार के कोविड-19 संक्रमित अथवा संदिग्ध सदस्यों को उपचार के लिए भर्ती करने अथवा उपचार करने से मना तो नहीं किया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र परिवार का कोई सदस्य जिसका आयुष्मान कार्ड नहीं है, यदि कोविड-19 संक्रमण से संक्रमित होकर आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार हेतु संबद्ध चिकित्सालय में उपचार करवाने हेतु जाता है तो संबंधित चिकित्सालय द्वारा तत्काल उसका आयुष्मान कार्ड बनाकर, उसे उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं एवं ऐसे व्यक्ति का उपचार करने से मना तो नहीं किया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान यह दल मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत निरामयम मप्र भोपाल द्वारा कोविड-19 महामारी के उपचार हेतु निर्धारित की गई दरों के अनुसार ही बिलिंग की जा रही है या नहीं, यह भी देखेंगे। साथ ही यह भी देखेंगे कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र व्यक्ति से अन्य किसी सेवा या उपचार के एवज में किसी भी प्रकार से राशि तो नहीं ली जा रही है।
अपर कलेक्टर श्री जेपी सचान द्वारा गठित दल में संयुक्त कलेक्टर श्री राजीव रंजन पांडे एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए.के. पांडे को वैष्णवी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, एसडी हॉस्पिटल देवगांव, लाइफ केयर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, श्री गोवर्धन राठी हॉस्पिटल, लश्करे चिकित्सालय एवं संजीवनी हॉस्पिटल के निरीक्षण/निगरानी/पर्यवेक्षण का जिम्मा सौंपा गया है।
इसी तरह डिप्टी कलेक्टर श्रीमती निशा बांगरे एवं कोविड-19 नोडल अधिकारी जिला चिकित्सालय डॉ. सौरभ राठौर करूणा हॉस्पिटल, सिटी हॉस्पिटल, आशीर्वाद नर्सिंग होम, चौहान मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, काकोडिय़ा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं पाढर हॉस्पिटल का निरीक्षण/निगरानी/पर्यवेक्षण करेंगे।

अपर कलेक्टर श्री सचान ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार एवं सीएमएचओ द्वारा जारी आदेशानुसार आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को छोडक़र अन्य मरीजों से निजी अस्पतालों/नर्सिंग होम द्वारा 29 फरवरी 2020 के पहले जो शुल्क मरीजों के उपचार हेतु लिया जा रहा था, उसमें अधिकतम 40 प्रतिशत् की वृद्धि कर कोविड-19 मरीजों से उपचार शुल्क लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की जांचों के लिए भी दरें निर्धारित की गई हैं। गठित दलों द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी चिकित्सालय द्वारा (आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों के अलावा) अन्य मरीजों से निर्धारित दर से अधिक शुल्क तो नहीं लिया जा रहा है।

दलों द्वारा चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों के अनुपात में ऑक्सीजन एवं आपातकालीन औषधियों की उपलब्धता की भी जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं किसी औषधि अथवा इंजेक्शन की कालाबाजारी तो नहीं हो रही। समस्त चिकित्सालयों में निर्धारित शुल्क की जानकारी सहज दृश्य स्थान पर प्रकाशित की गई हो, इसका भी निरीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा कोविड संक्रमण से ग्रसित व्यक्तियों के उपचार हेतु जिले में चिन्हित किए गए निजी चिकित्सालयों द्वारा संक्रमित व्यक्तियों को भर्ती करने/उपचार करने के लिए अकारण मना तो नहीं किया जा रहा, यह देखना भी दल की जिम्मेदारी में शामिल होगा। निरीक्षण के दौरान कोई अनियमितता एवं लापरवाही पाये जाने पर संबंधित चिकित्सालय/प्रबंधन के विरूद्ध नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट-2005, द एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1897 एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा 23 मार्च 2020 को जारी एपिडेमिक डिजीज कोविड-19 विनियमन 2020 के सुसंगत प्रावधानों के तहत यथोचित कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।