जल चिकित्सा से होते है कई रोग दूर नवीन वागद्रे

जलचिकित्सा में हम पानी के माध्यम से बहुत सारी बीमारियो को ठीक करते है । प्राक्रतिक चिकित्सा एवं योग का अध्यन कर रहे नवीन वागद्रे ने बताया की जल चिकित्सा में अलग अलग रोग के लिए अलग अलग जल की क्रियाएं होती हैं जैसे की जल नेति , कुंजल क्रिया, hip bath, spinal bath, एनिमा, और भी बहुत सारी क्रियाएं होती है जिन्हे आप घर पर कर के ठीक हो सकते है अगर आप यही सब क्रियाएं किसी स्पा सेंटर या प्राकृतिक चिकित्सालयो में करते है तो आपको काफी पैसे पढ़ सकते है । लेकिन वागद्रे ने बताया की आप इस लेख के माध्यम से घर पर एक दम फ्री में जल की कुछ क्रियाएं करके हमेशा स्वस्थ रह सकते है ।

आप सभी जानते है की हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है और इस पंचतत्वों से बने शरीर को पानी की सबसे ज्यादा जरुरत पड़ती है। शरीर का तीन-चौथाई भाग भी पानी से ही बना होता है। पानी हमारे सब प्रकार के आहारों जैसे फल, सब्जी, दूध में सम्मिलित रहता है, फिर भी हमको अपने शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है। पानी पीने से न केवल हमारे आंतरिक अवयव स्वच्छ रहते हैं, बल्कि उनमें

ताजगी भी बनी रहती है। पानी के गुणों और अवगुणों का संबंध उसके स्रोत पर निर्भर करता है। जैसे झरने का जल कफनाशक, हल्का और दिल को ताकत देनेवाला होता है। ओस का पानी प्रकृति से ठंडा तथा रूखा होता है। बर्फ का पानी ठंडा, भारी तथा पित्त रोगों में लाभदायक होता है। सरोवर का जल मीठा, बलदायक तथा प्यास को बुझाता है। इसी प्रकार दिन भर सूर्य की किरणों से तपा हुआ तथा रात में चंद्रमा की किरणों से युक्त पानी ठंडा हल्का, दोषनाशक, बलदायक, बुद्धिवर्धक अर्थात् अमृत के समान होता है। जल चिकित्सा बहुत असरदार होती है। साथ ही इसकी एक खास बात है कि इसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।


अगर आपको दर्द, सूजन, फोड़े-फुसी हो तो आप सुबह शाम गरम और ठंडे पानी से सिकाई करे।

पेट में यदि दर्द हो रहा हो तो गर्म पानी की थैली जो आजकल मार्केट में मिलती है या रबर की बोतल में गर्म पानी भर उसका सेंक करने से पेट दर्द दूर हो जाता है। अकसर पेट-दर्द गलत खान-पान से होता है जिससे पेट में गैस बनती है इसके लिए आप एनीमा ले सकते है । एनीमा से पेट का जमा हुआ मल,कब्ज गैस आदि सब ठीक हो जाते है।

पैरों में पसीना आने की बीमारी हो, तो पहले गर्म पानी में और फिर ठंडे पानी में क्रमश: पांच-पांच मिनट पैर रखने चाहिए। फिर बाद में रगड़कर पोंछ लें यह प्रयोग कम-से-कम हफ्ते भर करें। जल चिकित्सा के इस उपाय से अन्य शारीरिक विकारों को भी दूर किया जा सकता है।

पाचन क्रिया दुरुस्त रखने के लिए जल चिकित्सा : इसके लिए कमर स्नान जिसे कटि स्नान या hip bath भी कहा जाता है काफी फायदेमंद होता है। Hip bath कैसे करे उसकी सम्पूर्ण वीडियो आप Naveen Wagadre YouTube चैनल मे जाके देख सकते है।

ज्यादा चलने ज्यादा काम करने या ऊंचाई पर चढ़ने से पैरों में आई थकान को दूर करने के लिए शाम को गर्म पानी में थोड़ा नमक डालकर पांच-दस मिनट डुबो कर रखें, इससे सारी थकान दूर हो जाएगी।

मसूढ़े फूलकर दर्द करते हों, तो गर्म पानी से कुल्ला करें। दांत दर्द में पहले दो मिनट सहनीय गर्म पानी मुंह में रखें, फिर बहुत ठंडा पानी दो मिनट रखें। इस क्रिया को चार-पांच बार दोहराने से दांत दर्द मिट जाएगा।
शरीर के किसी भी हिस्से के जल जाने पर तुरंत ही उस पर ठंडा पानी तब तक डालें, जब तक कि जलन समाप्त न हो जाए। बर्फ के पानी में जले हुए अंग को डुबा कर रखना और भी अधिक लाभदायक उपाय है। जल चिकित्सा के इस उपाय से न केवल शीघ्र आराम मिलेगा, बल्कि जले हुए का निशान भी नहीं पड़ेगा।

अगर आपको किसी प्रकार की चोट या घाव लगा हो और जब तक दवा उपलब्ध न हो तब तक ठंडे पानी की पट्टी रखें। व उसे गीला करते रहें। दिन में दो-तीन बार पट्टी बदल कर दोहराते रहने से छोटे मोटे घाव यूं ही ठीक हो जाते हैं।

अगर आपको तेज बुखार हो ऐसे में ठंडे पानी की पट्टियां माथे पर रखने और बार-बार भिगो कर बदलते रहने से शरीर का तापक्रम कम हो जाता है।

गर्मी में या शरीर में किसी कारणवश गर्मी की अधिकता से कभी-कभी नाक से खून निकलने लगता है ऐसे में रोगी की नाक पर ठंडे पानी के छींटे मारने चाहिए। साथ ही सिर पर ठंडा पानी डालें और रोगी के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें। कुछ ही देर में रोगी को आराम मिल जाएगा।

अनिद्रा अर्थात रात में सोते समय नींद न आती हो ऐसे में सोने से पहले ठंडे जल से स्नान करें। नहाते समय सिर पर पानी की धार डाले।

मौसम बदलते ही जिन्हे सर्दी-जुकाम हो जातें है इससे निजात पाने के लिए आप “जल नेति क्रिया” करे। जल नेति क्रिया कैसे करे सम्पूर्ण वीडियो Naveen Wagadre YouTube चैनल पर डली हुई है वहा जा कर आप देख सकते है ।