खामला में हो रहै अवैध शराब के कारोबार पर नही है किसी का अंकुश, खुलेआम बिक रही शराब

मोहित राठौर भैसदेही

भैंसदेही के खामला ग्राम में अवैध शराब के कारोबार जोरो पर है। जगह जगह बिक रही शराब से गांव के अन्य लोग भी परेशान है।

लोग बताते है कि अवैध रूप से महाराष्ट्र से शराब लाकर भारी मात्रा में ग्रामीणों को बेची जा रही है ।आश्चर्यजनक बात यह है कि इस प्रकार महाराष्ट्र से आने वाली शराब को खामला पंचायत की कई दुकानों से खुलेआम बेची जा रही है ।

कुछ शराब ठेकेदारों की मिलीभगत से ग्रामीण क्षेत्रों के भोले भाले लोगों को अवैध शराब के धंधे में लिप्त किया जा रहा है।

अपनी निर्धारित शराब दुकान से शराब बेचने के बजाय गांव गांव में छोटे छोटे दुकानदारों को शराब के धंधे से जोड़कर इस अवैध धंधे में लिप्त किया जा रहा है।

अधिक कमाई के लालच में अब ये दुकानदार अन्य जगहों से अपने स्तर पर शराब खरीदकर लाकर बेच रहे है। जिससे पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी अवैध रूप से शराब आकर बिक रही है।

जिम्मेदार अधिकारियों की खामोशी पर भी क्षेत्र की जागरूक जनता ने कई सवाल उठाए हैं।

*तहसील अधिकारी भादे सर जिनसे फोन से संपर्क किया तो उनका फोन बंद आया*

 

*सहायक जिला आबकारी बैतूल अधिकारी अशोक मोहरे का कहना है कि

अगर ग्राम खामला में अवैध शराब बिक्री की जा रही है तो निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में आबकारी संबंधी अपराधों पर अकुंश लगाने मृत्युदण्ड का प्रावधान

 

मंत्रि-परिषद के निर्णय

मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश में आबकारी सम्बन्धी अपराधों को हतोत्साहित करने की दृष्टि से विभिन्न प्रकार के अपराध पर अधिरोपित होने वाली शास्ति दण्ड तथा फाईन में वृद्धि करने के लिए मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम(संशोधन) विधेयक, 2021 का अनुमोदन किया गया है। इसमें मुख्यत: धारा 49 (ए) के अन्तर्गत जहरीली शराब से सम्बन्धित अपराधों के लिए दण्ड का प्रावधान है। यदि जहरीली शराब के सेवन से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो इस अपराध के लिए दोषी को आजीवन कारावास या मृत्युदण्ड और न्यूनतम 20 लाख रूपये तक का जुर्माना का प्रावधान किया गया है। इससे अपराधों पर नियंत्रण बढ़ेगा।

संशोधन विधेयक में मानवीय उपयोग के लिए अनुपयुक्त अपमिश्रित मदिरा सेवन से शारीरिक क्षति होने पर पहली बार में न्यूनतम 2 वर्ष और अधिकतम 8 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम 2 लाख रूपये तक का जुर्माना तथा दूसरी बार अपराध करने पर न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम 10 लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया है। इसी तरह मानवीय उपयोग के लिए अनुपयुक्त अपमिश्रित मदिरा मिलने पर पहली बार में न्यूनतम 6 माह और अधिकतम 6 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम 1 लाख रूपये तक का जुर्माना तथा दूसरी बार अपराध करने पर न्यूनतम 6 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम 5 लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। किसी आबकारी अधिकारी द्वारा किसी भी ऐसे व्यक्ति को जो अधिनियम के अंतर्गत कर्त्तव्य निष्पादन में बाधा डाले या हमला करे, उसे गिरफ्तार किया जा सकेगा।

प्रदेश में महुआ आधारित मदिरा को मुख्य धारा में लाने के लिए उसे हैरिटेज (पारम्परिक) मदिरा का दर्जा दिये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके नियंत्रित निर्माण एवं विक्रय के लिए विभाग द्वारा नियम निर्धारित किये जाएंगे। इससे महुआ से निर्मित मदिरा के लघु उद्योग प्रोत्साहित होंगे। अधिनियम में पहले से प्रावधानित आदिवासियों के अधिकार यथावत सुरक्षित रखे जायेंगे।