एक सवाल के जवाब में केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि मध्यप्रदेश इस समय पेट्रोल पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूल रहा है। … सोमवार को मंत्री ने लोकसभा के जरिए यह जानकारी दी।

मध्यप्रदेश (MP) पेट्रोल और राजस्थान डीजल पर देश में सर्वाधिक टैक्स वसूलता है। यह जानकारी सोमवार को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में दी। एक लिखित जवाब में उन्होंने बताया, ‘मध्यप्रदेश पेट्रोल पर 31.55 रुपए प्रति लीटर वैट लगाता है, जो देश में सर्वाधिक है। वहीं, राजस्थान डीजल पर 21.82 रुपए प्रति लीटर वैट लेता है।’ पेट्रोल और डीजल पर सबसे कम वैट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में क्रमशः 4.82 रुपए और 4.74 रुपए प्रति लीटर है।

दरअसल, लोकसभा सदस्य उदय प्रताप सिंह और रोडमल नागर ने पूछा था कि क्या सरकार पूरे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को एक समान करने की योजना बना रही है? इस पर पुरी ने बताया, ‘पेट्रोल और डीजल के मूल्य वैट और स्थानीय वसूलियों जैसे घटकों के कारण हर जगह अलग होते हैं। इसलिए देश में पेट्रोल, डीजल की कीमतें एक समान करने की योजना नहीं है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क 32 रुपए लेते हैं, इसका उपयोग योजनाओं पर
पुरी ने एक अन्य उत्तर में कहा, 2010 से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों से तय होती है। इन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में 32 रुपए लिए जाते हैं। इस राजस्व का उपयोग 80 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत सहायता देने में किया जाता है। इसके अलावा लोगों को नि:शुल्क टीका लगाने, न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करने और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि आदि में किया जाता है।

86% बढ़ा कुल टैक्स कलैक्शन
केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल कर संग्रह लगभग 86% बढ़कर 5.57 लाख करोड़ रुपए रहा। वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में प्रत्यक्ष कर संग्रह 2.47 लाख करोड़ रुपए रहा था।

वैट वसूलने के राजस्थान और MP आगे
राजस्थान में पेट्रोल पर 36 और डीजल पर 26% वैट वसूला जाता है। वहीं अगर मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां पेट्रोल पर 33 और डीजल पर 23% वैट वसूला जा रहा है। यह मणिपुर और तेलंगाना के बाद सबसे ज्यादा है। MP में वैट के अलावा पेट्रोल पर 4.50 और डीजल पर 3 रुपए लीटर टैक्स वैट लगाने के बाद अलग से वसूला जाता है।

पेट्रोल पर कितना है टैक्स?
आप जो पेट्रोल 100 रुपये लीटर खरीद रहे हैं, वह इतना महंगा है नहीं। इंडियन ऑयल (IOC) के मुताबिक एक लीटर पेट्रोल की एक्स फैक्ट्री कीमत तो महज 31.82 रुपये ही है। दरअसल, अपने यहां पेट्रोल और डीजल के जरिए केंद्र और तमाम राज्य सरकारें अपना खजाना भरने का काम करती हैं। इन उत्पादों के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों को मोटी कमाई होती है। दिल्ली की ही बात करें तो यहां केंद्र सरकार 32.90 रुपये का टैक्स वसूल रही है तो राज्य सरकार 20.61 रुपये का। केंद्र और राज्यों का कुल टैक्स 53.51 रुपये बन जाता है।

डीजल पर टैक्स
डीजल महंगा ईंधन होता है। लकिन इसका उपयोग खेती-बाड़ी के अलावा सामानों की ढुलाई में भी खूब होता है। यदि इस पर ज्यादा टैक्स थोपा गया तो न सिर्फ खेती महंगी हो जाती है बल्कि बाजार में महंगाई भी भड़कती है। तब भी यहां करीब 130 फीसदी का टैक्स वसूला जाता है। दिल्ली में प्रति लीटर डीजल का एक्स फैक्ट्री प्राइस 33.46 रुपये है। इस पर केंद्र सरकार का टैक्स 31.80 रुपये है जबकि राज्य सरकार का टैक्स 11.68 रुपये है। इस तरह से कुल टैक्स ही 43.48 रुपये प्रति लीटर बन जाता है।

और होती कमाई लेकिन…
इन दोनों ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से सरकार का टैक्स कलेक्शन 3.35 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. रामेश्वर तेली के मुताबिक, यह आंकड़ा अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच का है. ठीक एक साल पहले इसी अवधि में पेट्रोल-डीजल से टैक्स कलेक्शन 1.78 लाख करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर 3.35 लाख करोड़ पर पहुंच गया है. सरकार को इस मद में और भी कमाई होती, लेकिन लॉकडाउन के चलते इसमें गिरावट देखी गई. लॉकडाउन और कोरोना प्रतिबंधों के चलते वाहन की आवाजाही बंद होने से पेट्रोल और डीजल की मांग घटी रही जिससे टैक्स कलेक्शन भी कम रहा.