किसान हो रहे परेशान , बैंक में भुगतान के लिए घंटों इंतजार

घोड़ाडोंगरी । कुछ ऐसी ही स्थिति है यहां के जिला सहकारी बैंक के सामने । मेहनतकश किसानों को अपनी फसल का भुगतान की राशी खाते से राशि निकालने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है ।

यहां के इस बैंक से अपने खाते से गेहूं , चने का भुगतान निकालने के लिए किसान आसपास के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से आते हैं । जिन्हें बैंक से राशि निकालने के लिए दिन भर लग जाता है ।

किसान सुबह से ही नंबर लगाने के लिए जल्दी घर से आ जाते हैं। बैंक खुलने के बाद पासबुक और विड्राल जमा करने के बाद उन्हें भुगतान के लिए 4 से 5 घंटे का इंतजार करना पड़ता है।

किसान की किस्मत में है सिर्फ इंतजार

देश में अन्नदाता कहलाने वाला किसान पहले अपनी फसल खेत में बोने के बाद चार माह तक पकने का इंतजार करता है । उसके बाद समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए s.m.s. का इंतजार करता है ।उसके बाद गेहूं बिक्री की राशि खाते में आने का इंतजार करता है और अब जिन किसानों के खाते में राशि आ चुकी है । वह बैंक के सामने अपने खाते से राशि निकालने के लिए घंटों इंतजार करते हैं ।

यह है जिला सहकारी बैंक घोड़ाडोंगरी की स्थिति

देखें तो यहां अन्नदाता को बैंक के अंदर जाने तक की परमिशन नहीं है। शटर गेट के पास से ही वह पासबुक और विड्राल बैंक के कर्मचारी को दे देता है ।उसके बाद राशि के लिए चार-पांच घंटे का इंतजार करता है ।किसानों ने बताया कि इस बैंक से राशि निकालने के लिए पूरा दिन देना पड़ता है । तब जाकर खाते से पैसा निकल पाता है । कई बार कटे फटे बदहाल नोटों से भुगतान किया जाता है जिन्हें लेने के बाद फिर उन्हें बदलवाने में मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार उन्हें कर्मचारी दुत्कारते देखने को मिलता है और किसान को हाथ जोड़ते देखा जा सकता है।

बरसों से है यही स्थिति

ऐसा नहीं है कि इस बैंक की ऐसी स्थिति अभी कोरोना काल में ही है । इस बैंक से हमेशा ही राशि निकलवाने के लिए किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है । यहां की लचर कार्यप्रणाली के कारण किसान परेशान है।

किसानों पर ही कार्यवाही का डर

बैंक के सामने अपने खाते से राशि निकालने का इंतजार कर रहे किसानों पर ही प्रशासन की कार्यवाही का डर मंडराता रहता है की क्यों भीड़ लगी है। आजकल अक्सर सोशल मीडिया के माध्यम से आस पास के व्यापारी भी उन इंतजार करते किसानों की भीड़ की फोटो खींचकर प्रशासन को भेज कर शिकायत करते रहते हैं, लेकिन कोई बैंक के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों से यह सवाल नहीं करता की किसानों को राशि निकालने में इतना इंतजार क्यों करवा रहे हो ।

नही है कोई समय

बैंक में खाते से राशि निकालने का भी एक समय निर्धारित होता है।कितने मिनट राशि निकालने में लगना चाहिए। लेकिन यहां पर ऐसे कोई नियम का पालन नहीं हो रहा है। जिससे किसानों को समय पर भुगतान मिल सके ।अन्नदाता अपने ही खाते से राशि निकालने के लिए घंटों इंतजार भी कर रहा है और भीड़ होने पर प्रशासन की कार्यवाही का डर भी उसे ही सता रहा है ।

जिम्मेदार उदासीन

लेकिन जो इसके लिए जिम्मेदार हैं । उनसे कोई नहीं पूछना चाहता है कि किसानों को इतनी देर इंतजार क्यों करवाया जा रहा है।

जबरदस्ती की मुसीबत

अधिकांश किसानों के अन्य बैंको में भी खाते है। लेकिन जिले में नियम ही चल रहा है। गेहू बिक्री के लिये जिला सहकारी बैंक का ही खाता चाहिए। इसलिए किसानों से जबरन जिला सहकारी बैंक में खाते खुलवा दिए गये है। अब किसानों को भुगतान भी घँटों इंतजार के बाद करते है। कुल मिलाकर परेशान किसान ही हो रहा है।लेकिन उसकी पीड़ा कोई जिम्मेदार सुनना ही नही चाहता।