सरसों फसल में कम लागत से अधिक लाभ प्राप्त करे किसान भाई
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किसान भाई सरसों फसल में कम लागत से अधिक लाभ प्राप्त करें। उप संचालक कृषि ने बताया है कि सरसों की खेती रबी मौसम में उगाई जाने वाली तिलहनी फसल है। सरसों की खेती सिंचित और असिंचित अर्थात अर्द्नमी वाले क्षेत्रो में अच्छी तरह की जा सकती है। सरसों के उत्पादन में कम लागत तकनीकि से अधिक उत्पादन मिलने की संभावना होती है। कृषक भाई उन्नत कृषि तकनीकि को अपना कर सरसों की खेती में औसत पैदावार से 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन ले सकते हैं। सरसो का तेल मुख्य रूप से खाद्य एवं औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।

देश में तिलहनी फसलों का कम उत्पादन तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत सरकार द्वारा तिलहनी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तिलहन योजना संचालित है, जिसमें कृषकों की उपज को भारत सरकार द्वारा समर्थन मूल 5050 रूपए प्रति क्विटल खरीदी जाती है।

उन्होंने किसान भाईयो को बताया है कि सरसों की खेती लेने के लिए भूमि की जुताई एवं तैयारी करे, हल्की दोमट, बलुई भूमि के साथ मध्यम गहरी भूमि में इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से एक जुताई क्रासिंग कर एक जुताई कल्टीवेटर से कर अच्छी तरह एक पाटा लगा देने से मिट्टी भुरभुरी बन जाती है। सरसो की उन्नत किस्म के बीजो में पूसा बोल्ड, गिरीराज, क्रांति, वरूणा, जेएम-2 है, इनका बीजोपचार 2 ग्राम वाविस्टीन अथवा कार्बेन्डाजिम से करे, बीज 5 से 6 किलोग्राम प्रति हैक्टर की दर से उपयोग करे, बुआई का समय अक्टूबर से नवम्बर मध्य माह तक उपयुक्त होता है, बुआई में एक कतार से दूसरी कतारी की दूरी 8 से 10 सेंटी मीटर रखने से उत्पादन अच्छा होता है। सरसो के खेत में अच्छी सड़ी हुई भुरभुरी गोबर की खाद 8 से 10 टन प्रति हैक्टेयर डालना उपयुक्त होता है। इसी तरह से सिंचित फसल में 80 से 120 किलोग्राम नत्रजन, 50 से 60 किलोग्राम फास्फोरस एवं 20 से 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हैक्टयर उपयोग किया जा सकता है। किसान भाई उन्नत तकनीकि का उपयोग कर औसत पैदावार 8 से 10 क्विटल प्रति एकड़ से भी अधिक उत्पादन कर सकते हैं।