कब्ज़ क्या है ? यह किन कारणों से होता है तथा इसके कारण हमारे शरीर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ते? तथा इस से कैसे बचें?………

नवीन वागद्रे
फाइबरयुक्त पदार्थ कम खाने ,पानी कम पीने व तैलीय पदार्थ ज्यादा खाने से कब्ज होता है जिससे हमारी कोलन की मांसपेशियो में धीरे-धीरे प्रभाव पड़ता है।

इसका कारण:
 ज्यादातर बाजार में मिलने वाले पैकेट की वस्तुओं (Junk Food) को खाने से कब्ज की समस्या होती है।या फिर
 जो शारीरिक रूप से निष्क्रिय होते है उनको कब्ज की समस्या हो जाती है।
 मनुष्य की बढ़ती उम्र के कारण शरीर में कब्ज की समस्या उत्पन्न होती है जिससे पेट में पचान क्रिया धीमी हो जाती है, और कॉन्स्टीपेशन का सिकार हो जाते है रोजाना खाने में बदलाव भी एक तरह से कब्ज का कारण होता है ।

कैसे पता करे कि हमें कब्ज है व इसके क्या लक्षण है ?

अगर शौचालय जाने पर मल का सख्त होना, कुछ लोगो के मुँह से बदबू आना तथा जीभ का सफ़ेद और मटमैली हो जाना भूख नहीं लगना जी मचलता रहना शौचालय जाने पर ठीक से शौच नहीं होना पेट में सूजन और दर्द होना है एसीडिटी,व गैस की समस्या होना यह सब कब्ज के लक्षण होते है । अगर आप में भी यह लक्षण है, तो बने रहिए मेरे साथ अंत तक ।

अब यह जानना भी बहुत जरूरी है कि कब्ज के कारण हमारे शरीर पर क्या दुष्प्रभाव पड़ते

जिन लोगों को कब्ज की समस्या होती है वह लोग अक्सर थके-थके नजर आते हैं। Actually पेट साफ नहीं होने के कारण शरीर के अंदर कार्बोहाइड्रेट का Level बढ़ता है और शरीर के अंदर कई गैसें बनना शुरू हो जाती हैं जिसके वजह से ऊर्जा प्रदान करने वाली सेल्स पर प्रभाव पड़ता है। डिटॉक्सिफाई ना होने के कारण शरीर में बनने वाले टॉक्सिक पदार्थ खून के प्रवाह में शामिल हो जाते हैं जिसकी वजह से ऊर्जा का स्तर घटने लगता है और इंसान जल्दी थकावट महसूस करने लगता है। ‌कब्ज की समस्या के वजह से वजन बढ़ने लगता है। मल त्याग करते समय oestrogen नाम के हार्मोन शरीर से बाहर निकल जाते हैं जो मोटापे का कारण होते हैं। अगर लंबे समय से कब्ज की समस्या रहती है तो ठीक से पेट साफ ना होने के वजह से यह हार्मोन पाचन तंत्र में बार-बार सम्मिलित होने लगते हैं जिसकी वजह से वजन बढ़ने लगता है।

समय-समय पर मल त्याग नहीं होने के कारण शरीर में टॉक्सिंस बनने लगते हैं जो हमारे खून में जाकर मिल जाते हैं और खून को दूषित करते हैं जिसका असर हमारे skin पर पड़ता है। इस वजह से हमारी skin बेजान होने लगती है और में कील-मुहांसों की समस्या भी बढ़ जाती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है
कब्ज की वजह से शरीर के अंदर वायरस, बैक्टीरिया और कैंसर वाले सेल बढ़ने लगते हैं। यह हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालते हैं और उसे कमजोर बनाते हैं। लंबे समय से कब्ज की समस्या की वजह से हमारे यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन भी हो सकता है।

अब जानते है कि कैसे हम कब्ज़ से बच सकते है

कब्ज़ से बचने के लिए हमे फाइबर युक्त आहार ज्यादा लेना चाहिए,जैसे हरी सब्जिया,चने,पपीता, और व्यायाम करना चाहिए जिससे शरीर में गतिविधिया बढ़ती है and कब्ज की समस्या नहीं होती ।

बेल का फल भी कब्ज की समस्या के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
आधा कप बेल का गूदा, और एक चम्मच गुड़ का सेवन, शाम को खाना खाने से पहले करें। या फिर आप बेल का शरबत भी पी सकते है यह कब्ज में फायदा करता है।

जीरा और अजवायन से कब्ज का इलाज

जीरे और अजवायन को धीमी आंच पर भून कर पीस लें। इसमें काला नमक डालकर तीनों को समान मात्रा में मिला कर डब्बे में रख लें। रोज आधा चम्मच की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ पिएं। इस से भी काफी आराम मिलता है

सौंफ का इस्तेमाल कब्ज में फायदेमंद
रात में सोने से पहले एक चम्मच भुनी हुई सौंफ गरम पानी के साथ पिएं। सौंफ में पाए जाने वाले उड़नशील तेल पाचन क्रिया को दुरुस्त करते हैं, तथा Gastric enzymes के उत्पादन को बढ़ाते हैं।

इसके अलावा आप वायु मुद्रा, एनिमा, फास्टिंग थेरेपी, mud थैरेपी भी ले सकते है ।